Sona Machinery IPO 5 मार्च से; प्राइस बैंड, लॉट साइज, रिजर्व हिस्से की ये है डिटेल

Sona Machinery IPO: कंपनी की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। IPO में बोली लगाने के लिए मिनिमम लॉट साइज 1000 शेयरों का रखा गया है। Sona Machinery के प्रोडक्ट निर्यात भी होते हैं। IPO से होने वाली कमाई में से 55 प्रतिशत हिस्सा गाजियाबाद में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए पूंजीगत खर्च के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा

अपडेटेड Mar 02, 2024 पर 2:14 PM
Sona Machinery IPO के लिए मार्केट मेकर Hem Finlease है।

Sona Machinery IPO: खेतीबाड़ी से जुड़ी मशीनरी बनाने वाली एसएमई कंपनी Sona Machinery का IPO 5 मार्च को खुलने वाला है। कंपनी का प्लान इस इश्यू से 51.82 करोड़ रुपये जुटाने का है। यह आईपीओ 7 मार्च को क्लोज होगा और उसके बाद शेयरों की लिस्टिंग NSE SME पर 13 मार्च को हो सकती है। इस आईपीओ में केवल 36.24 लाख नए शेयर जारी होंगे। कंपनी ने अपने आईपीओ के लिए प्राइस बैंड 136 से 143 रुपये प्रति शेयर तय किया है। आईपीओ के​ लिए Hem Securities Limited को बुक रनिंग लीड मैनेजर और Maashitla Securities Private Limited को रजिस्ट्रार बनाया गया है। मार्केट मेकर Hem Finlease है।

Sona Machinery IPO में बोली लगाने के लिए मिनिमम लॉट साइज 1000 शेयरों का रखा गया है। कंपनी के प्रमोटर वासु नरेन और श्वेता बैसला हैं। वर्तमान में प्रमोटर्स की कंपनी में हिस्सेदारी 100 प्रतिशत है, जो आईपीओ के बाद घटकर 73.59 प्रतिशत रह जाएगी। IPO का 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

क्या-क्या बनाती है कंपनी


Sona Machinery की शुरुआत साल 2019 में हुई थी। यह खेतीबाड़ी से जुड़ी मशीनरी बनाती है, जिनमें चावल, दाल, गेहूं, मसाला और Barnyard Millet की प्रोसेसिंग के लिए मशीनरी शामिल हैं। कंपनी कंपनी अनाज प्री-क्लीनर मशीनें, रोटरी ड्रम क्लीनर, वाइब्रो क्लासिफायर, स्टोन सेपरेटर मशीनें, पैडी डी-हस्कर, हस्क एस्पिरेटर, राइस थिक/थिन ग्रेडर, राइस व्हाइटनर, सिल्की पॉलिशर, मल्टी ग्रेडर, लेंथ ग्रेडर, बेल्ट कनवेयर, बकेट एलिवेटर भी बनाती है। इसके प्रोडक्ट निर्यात भी होते हैं।

Sona Machinery IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

IPO से होने वाली कमाई में से 55 प्रतिशत हिस्सा गाजियाबाद में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए पूंजीगत खर्च के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। 4 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल मशीनरी खरीदने के उद्देश्य से लिए गए कर्ज को चुकाने में और बाकी बचे पैसे का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के​ लिए किया जाएगा। गाजियाबाद में प्लांट लगाने के लिए कंपनी लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

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