Startup IPO: पिछले साल धड़ाधड़ स्टार्टअप्स ने स्टॉक मार्केट में एंट्री की थी लेकिन आईपीओ निवेशकों की खुशी लंबे समय तक कायम नहीं रह पाई। इनमें से अधिकतर के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे चल रहे हैं। मनीकंट्रोल की एनालिसिस के हिसाब से पिछले साल लिस्ट हुई 15 न्यू-एज टेक कंपनियों में से 8 के शेयर फिलहाल अपने इश्यू प्राइस से नीचे हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट में उठा-पटक, आईपीओ की आक्रामक कीमतें और लिस्टिंग के बाद कंपनियों के कमजोर कारोबारी नतीजे पर ये दबाव में आए।
कुछ ही कंपनियों जैसे कि लेंसकार्ट (Lenskart), ग्रो (Groww), मीशो (Meesho) और एथर एनर्जी (Ather Energy) अब भी अपने लिस्टिंग प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं लेकिन बढ़त भी बहुत अधिक नहीं है। वहीं अर्बन कंपनी (Urban Company), ब्लूस्टोन (BlueStone) और जैपफ्रेश (Zappfresh) जैसी कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस से सिर्फ थोड़े ही ऊपर हैं।
Iran-US War से बिगड़ा निवेशकों का मूड
ईरान की अमेरिका और इजरायल से लड़ाई चल रही है जिसने मार्केट में निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है और इससे हाल में नए लिस्ट हुए शेयरों को झटका लगा। इंवेस्टमेंट एडवाइजरी फर्म कैपिटलमाइंड के फाउंडर दीपक शेनॉय का कहना है कि युद्ध के माहौल में नई लिस्ट हुई कंपनियों के शेयर ज्यादा तेजी से गिरते हैं। इसके अलावा जब लिस्टिंग के कुछ महीनों बाद वेंचर कैपिटल निवेशकों का लॉक-इन पीरियड खत्म होता है, तो शेयरों पर बिकवाली का अतिरिक्त दबाव भी आ सकता है। इसके अलावा वैश्विक निवेशक भी काफी सतर्क हो गए हैं क्योंकि भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पूंजी का बड़े स्रोतं पश्चिमी एशिया के सॉवरेन वेल्थ फंड मौजूदा परिस्थितियों में अपने क्षेत्रीय निवेश को प्राथमिकता दे सकते हैं।
आक्रामक आईपीओ प्राइसिंग का दबाव
एक्सपर्ट्स के मुताबिक मौजूदा गिरावट आईपीओ को लेकर निवेशकों में बड़े उत्साह के बाद बड़े पैमाने पर रीसेट को दिखाता है। पिछले दो वर्षों में देश के आईपीओ मार्केट में वेंचर्स के निवेश वाली कंपनियों की लिस्टिंग तेजी से बढ़ी, क्योंकि प्राइवेट फंडिंग कम हो रही थी और निवेशक हाई-ग्रोथ टेक स्टोरी में पैसा लगा रहे थे।
एडवाइजरी फर्म इनगवर्न के फाउंडर श्रीराम सुब्रमणियन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाजार में आईपीओ को लेकर जबरदस्त रुझान था और इसे देखते हुए इंवेस्टमेंट बैंकर्स ने आईपीओ के भाव काफी ऊंची रखी जबकि निवेशक फटाफट 20% से 50% तक के मुनाफे की उम्मीद में थे। वर्ष 2025 में 15 टेक और कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों ने आईपीओ के जरिए लगभग ₹40,000 करोड़ जुटाए, जो वर्ष 2024 में ऐसे 13 आईपीओ के जरिए जुटाए गए करीब ₹29,000 करोड़ से 35% अधिक रहा।
लिस्टिंग के बाद असली तस्वीर आई सामने
अक्सर स्टार्टअप आईपीओ से पहले अपने वित्तीय आंकड़ों को बेहतर दिखाने की कोशिश करती हैं। आईपीओ से पहले कई स्टार्टअप्स ने लागत कम की और मुनाफे में आने की कोशिश तेज की। सुब्रमणियन के मुताबिक असली तस्वीर अक्सर लिस्टिंग के बाद सामने आती है। उन्होंने कहा कि कंपनियां आईपीओ से पहले अपने वित्तीय आंकड़ों को सजाकर पेश करती हैं, लेकिन जब कंपनी सामान्य रूप से काम करने लगती है तो उनका असली चेहरा दिखने लगता है।
मजबूत और कमजोर कंपनियों को अलग कर रहा मार्केट
एनालिस्ट्स का कहना है कि मौजूदा माहौल में मार्केट मजबूत और कमजोर कंपनियों को अलग करने लगा है। जो कंपनियां मजबूत ऑपरेटिंग परफॉरमेंस के साथ मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं, वह निवेशकों का भरोसा बनाए रखने को लेकर बेहतर स्थिति में हैं। Claypond Capital के एमडी शेखर गरिसा का कहना है कि अच्छी कंपनियां हमेशा अच्छा प्रदर्शन करेंगी और ऐसे समय में बेहतर कंपनियां बाकी कंपनियों से अलग दिखाई देती हैं। Catamaran के प्रेसिडेंट दीपक पडकी का कहना है कि वेंचर-कैपिटल के निवेश वाली कंपनियों की लिस्टिंग अभी भी नया ट्रेंड है, तो ऐसे में निवेशक और बाजार दोनों अभी सीख रहे हैं।
स्टार्टअप आईपीओ स्टॉक्स की गिरावट आने वाले समय में लिस्टिंग पर असर डाल सकती है। इस साल 2026 में फोनपे, फ्लिपकार्ट, ज़ेप्टो, बोट, शैडोफैक्स और इंफ्रा.मार्केट जैसे 20 से ज्यादा स्टार्टअप आईपीओ की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि मार्केट वोलैटिलिटी और जियोपॉलिटिकल टेंशन के चलते कुछ कंपनियां अपनी लिस्टिंग टालने या वैल्यूएशन कम होने के रिस्क का आकलन कर रही हैं। दीपक शेनॉय के मुताबिक अगर मार्केट कमजोर है तो कंपनियां आईपीओ लाने से बचना चाहेंगी और बेहतर माहौल का इंतजार करेंगी। अब एनालिस्ट्स का मानना है कि स्टार्टअप आईपीओ के अगले चरण में कंपनियों के लिए मुनाफे, मजबूत ऑपरेटिंग परफॉरमेंस और टिकाऊ ग्रोथ पर अधिक ध्यान देना होगा, तभी वे पब्लिक मार्केट में प्रीमियम वैल्यूएशन हासिल कर पाएंगी।
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