Get App

Startup IPO: 2025 में लिस्टेड 16 में 8 स्टार्टअप्स अब इश्यू प्राइस से भी नीचे, इस कारण बिगड़ा माहौल, एक्सपर्ट की ये है राय

Startup IPO: घरेलू स्टॉक मार्केट में स्टार्टअप्स धड़ाधड़ लिस्ट हो रही हैं और इन्हें निवेशकों का अच्छा रिस्पांस भी मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों को इस साल तगड़ा झटका लगा, जब पिछले साल लिस्ट हुए 15 स्टार्टअप्स में से 8 फिलहाल अपने इश्यू प्राइस से भी नीचे हैं। जानिए ऐसा क्यों हुआ, इसके चलते क्या बदला और आगे क्या माहौल है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Mar 16, 2026 पर 2:16 PM
Startup IPO: 2025 में लिस्टेड 16 में 8 स्टार्टअप्स अब इश्यू प्राइस से भी नीचे, इस कारण बिगड़ा माहौल, एक्सपर्ट की ये है राय
Startup IPO: वर्ष 2025 में 15 टेक और कंज्यूमर इंटरनेट कंपनियों ने आईपीओ के जरिए लगभग ₹40,000 करोड़ जुटाए, जो वर्ष 2024 में ऐसे 13 आईपीओ के जरिए जुटाए गए करीब ₹29,000 करोड़ से 35% अधिक रहा।

Startup IPO: पिछले साल धड़ाधड़ स्टार्टअप्स ने स्टॉक मार्केट में एंट्री की थी लेकिन आईपीओ निवेशकों की खुशी लंबे समय तक कायम नहीं रह पाई। इनमें से अधिकतर के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे चल रहे हैं। मनीकंट्रोल की एनालिसिस के हिसाब से पिछले साल लिस्ट हुई 15 न्यू-एज टेक कंपनियों में से 8 के शेयर फिलहाल अपने इश्यू प्राइस से नीचे हैं। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट में उठा-पटक, आईपीओ की आक्रामक कीमतें और लिस्टिंग के बाद कंपनियों के कमजोर कारोबारी नतीजे पर ये दबाव में आए।

कुछ ही कंपनियों जैसे कि लेंसकार्ट (Lenskart), ग्रो (Groww), मीशो (Meesho) और एथर एनर्जी (Ather Energy) अब भी अपने लिस्टिंग प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं लेकिन बढ़त भी बहुत अधिक नहीं है। वहीं अर्बन कंपनी (Urban Company), ब्लूस्टोन (BlueStone) और जैपफ्रेश (Zappfresh) जैसी कंपनियों के शेयर अपने इश्यू प्राइस से सिर्फ थोड़े ही ऊपर हैं।

Iran-US War से बिगड़ा निवेशकों का मूड

ईरान की अमेरिका और इजरायल से लड़ाई चल रही है जिसने मार्केट में निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है और इससे हाल में नए लिस्ट हुए शेयरों को झटका लगा। इंवेस्टमेंट एडवाइजरी फर्म कैपिटलमाइंड के फाउंडर दीपक शेनॉय का कहना है कि युद्ध के माहौल में नई लिस्ट हुई कंपनियों के शेयर ज्यादा तेजी से गिरते हैं। इसके अलावा जब लिस्टिंग के कुछ महीनों बाद वेंचर कैपिटल निवेशकों का लॉक-इन पीरियड खत्म होता है, तो शेयरों पर बिकवाली का अतिरिक्त दबाव भी आ सकता है। इसके अलावा वैश्विक निवेशक भी काफी सतर्क हो गए हैं क्योंकि भारतीय स्टार्टअप्स के लिए पूंजी का बड़े स्रोतं पश्चिमी एशिया के सॉवरेन वेल्थ फंड मौजूदा परिस्थितियों में अपने क्षेत्रीय निवेश को प्राथमिकता दे सकते हैं।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें