Swiggy IPO: फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर की कंपनी स्विगी के 11,327.43 करोड़ रुपये के इश्यू को दूसरे दिन भी ठंडा रिस्पॉन्स मिला। 7 नवंबर को क्लोजिंग तक IPO 0.35 गुना भरा । क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.28 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.14 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 0.84 गुना सब्सक्राइब हुआ। एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हिस्सा फुली सब्सक्राइब हो चुका है।
स्विगी IPO 6 नवंबर को ओपन हुआ और 8 नवंबर को क्लोज होगा। अलॉटमेंट 11 नवंबर को फाइनल होगा। शेयर BSE और NSE पर 13 नवंबर को लिस्ट होंगे। IPO में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड 371-390 रुपये प्रति शेयर और लॉट साइज 38 शेयर है।
एंकर इनवेस्टर्स से जुटाए 5085.02 करोड़
Swiggy IPO में 4,499 करोड़ रुपये के 11.54 करोड़ नए शेयर जारी हो रहे हैं। साथ ही 6,828.43 करोड़ रुपये के 17.51 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल है। कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 5,085.02 करोड़ रुपये जुटाए थे।
Swiggy IPO का 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के लिए और 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। 750,000 तक शेयर स्विगी एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हैं और उन्हें इश्यू प्राइस से 25 रुपये कम पर जारी किए जाएंगे।
लिस्टिंग से पहले Swiggy के शेयरों का ग्रे मार्केट में भाव लगातार गिर रहा है। ग्रे मार्केट में शेयर इस वक्त IPO के अपर प्राइस बैंड 390 रुपये से ऊपर 2 रुपये या 0.51 प्रतिशत के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। इस बेसिस पर शेयर 392 रुपये पर लिस्ट हो सकता है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।
Swiggy IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल
नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से कंपनी 164.8 करोड़ रुपये से अपनी सब्सिडयिरी Scootsy का कर्ज हल्का करेगी। 1,178.7 करोड़ रुपये से डार्क स्टोर नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, 703.4 करोड़ रुपये तकनीक और क्लाउड इंफ्रा में लगाए जाएंगे, 1115.3 करोड़ रुपये ब्रांड मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन पर खर्च होंगे। बाकी पैसों का इस्तेमाल अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा।
कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 में इसका घाटा 4,179.3 करोड़ रुपये से गिरकर 2,350.2 करोड़ रुपये पर आ गया। इस दौरान कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू 36 प्रतिशत बढ़कर 11,247.4 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष की बात करें तो जून तिमाही में कंपनी का घाटा सालाना आधार पर 564 करोड़ रुपये से बढ़कर 611 करोड़ रुपये पर पहुंच गया लेकिन रेवेन्यू 35 प्रतिशत बढ़कर 3,222.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
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