पुणे की कंपनी विशाल निर्मिति अपना IPO ला रही है। इसके लिए कंपनी को कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने सितंबर 2025 में अपने पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जमा किया था। इस पर SEBI ने 9 अप्रैल 2026 को ऑब्जर्वेशन जारी किए। ऑब्जर्वेशन जारी होने का मतलब है कि कंपनी अगले एक साल के अंदर सब्सक्रिप्शन के लिए अपना IPO लॉन्च कर सकती है।
विशाल निर्मिति एक सिविल इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनी है। यह रेलवे के लिए प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) स्लीपर बनाती है। कंपनी ने अपने IPO में नए शेयर जारी करके 125 करोड़ रुपये जुटाने का प्रस्ताव रखा है। वहीं प्रमोटर एंटिटी वामन प्री-स्ट्रेसिंग कंपनी ऑफर-फॉर-सेल के जरिए 15 लाख तक शेयर बेचने का इरादा रखती है।
रेलवे के लिए प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) स्लीपर बनाने और उनका व्यापार करने के अलावा, विशाल निर्मिति विभिन्न उपयोगों के लिए प्रीकास्ट और प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट उत्पादों के उत्पादन में भी है। यह पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSPs) के लिए माइल्ड स्टील पाइप (MS पाइप), MS लाइनर और पेनस्टॉक पाइप के फैब्रिकेशन और इरेक्शन के बिजनेस में भी है। फैब्रिकेशन यानि पाइप को काटना, जोड़ना, वेल्डिंग करके तैयार करना। इरेक्शन मतलब तैयार पाइप को साइट पर लगाना।
IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल
अगस्त 2025 तक विशाल निर्मिति की कंसोलिडेटेड ऑर्डर बुक 504.1 करोड़ रुपये की थी। कंपनी अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करने वाली है। इस पब्लिक इश्यू को मैनेज करने के लिए सैफ्रन कैपिटल एडवाइजर्स को बुक-रनिंग लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।
जैनम ब्रोकिंग के IPO को भी मंजूरी का इंतजार
इस बीच SEBI जैनम ब्रोकिंग के IPO के ड्राफ्ट पेपर्स पर स्टॉक एक्सचेंजों से 'सैद्धांतिक मंज़ूरी' (in-principle approval) का इंतजार कर रहा है। जैनम ब्रोकिंग ने अक्टूबर 2025 में गोपनीय तरीके से SEBI के पास ड्राफ्ट जमा किया था। कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं। कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।