क्विक कॉमर्स सेक्टर की कंपनी जेप्टो (Zepto) ने कॉन्फिडेंशियल रूट से अपने IPO का ड्राफ्ट कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी और शेयर बाजारों के पास जमा कर दिया है। कंपनी का मकसद 11000 करोड़ रुपये जुटाना है। जेप्टो अगले साल शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी में है। कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं।
कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।
जेप्टो के कॉम्पिटीटर जोमैटो और स्विगी पहले ही लिस्ट हो चुके हैं। जोमैटो की पेरेंट कंपनी इटर्नल जुलाई 2021 में लिस्ट हुई थी। इसका 9375 करोड़ रुपये का IPO 38.25 गुना भरा था। स्विगी नवंबर 2024 में लिस्ट हुई थी। इसका 11327.43 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू 3.59 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
जेप्टो को आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा ने 2021 में शुरू किया था। जेप्टो की वैल्यूएशन 7 अरब डॉलर है। इसने अपनी शुरुआत से अब तक कई बड़े इनवेस्टर्स से कुल 1.8 अरब डॉलर या लगभग 16,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं। अक्टूबर 2025 में हुए फंडिंग राउंड में कंपनी ने 45 करोड़ डॉलर (लगभग 3,757.5 करोड़ रुपये) जुटाए थे। जेप्टो ने अपने IPO के लिए गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली, जेएम फाइनेंशियल जैसे इनवेस्ट बैंकों को मर्चेंट बैंकर के तौर पर चुना है।
सितंबर 2025 तक, कंपनी के पास 900 से ज्यादा डार्क स्टोर थे। पहले जेप्टो 2025 में लिस्ट होने की सोच रही थी। लेकिन फिर उसने प्लान को कुछ महीने आगे बढ़ा दिया। जेप्टो अपना बेस सिंगापुर से वापस भारत में शिफ्ट कर चुकी है।
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