Get App

Lok Sabha Elections 2024: बदायूं लोकसभा सीट पर क्या हैं राजनीतिक समीकरण? BJP ने राज्यसभा चुनाव में ही कर दिया खेल

Lok Sabha Elections 2024: बदायूं लोकसभा सीट पर लड़ाई बहुत मुश्किल होगी, इसमें कोई संदेह नहीं। जाति समीकरण सपा के पक्ष में हैं, लेकिन BJP समर्थित मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं, जो सपा को संकट में डाल सकता है। फिलहाल बीजेपी उम्मीदवार के नाम का इंतजार हो रहा है कि कौन उम्मीदवार यहां से चुनाव लड़ेगा

Brijesh Shuklaअपडेटेड Mar 07, 2024 पर 8:26 AM
Lok Sabha Elections 2024: बदायूं लोकसभा सीट पर क्या हैं राजनीतिक समीकरण? BJP ने राज्यसभा चुनाव में ही कर दिया खेल
Lok Sabha Elections 2024: बदायूं से समाजवादी पार्टी ने अपने दिग्गज नेता और मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव को टिकट दिया

Lok Sabha Elections 2024: 'ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यूं आज तेरे नाम पे रोना आया'...... बदायूं (Budaun) का नाम आते ही शकील बदायूंनी याद आ जाते हैं और उनकी नज्में भी। उनकी तमाम पंक्तियां दिमाग में घूमने लगती हैं, जो उन्होंने लिखी थीं। यह शहर शकील बदायूं का है। साल 1916 में शकील बदायूनी इसी शहर में पैदा हुए। इस धरती ने इस्मत चुगताई, जीलानी बानो, दिलावर फिगार, आले अहमद सुरूर, अदा जाफरी, फानी बदायूंनी, बेखुद बदायूंनी जैसी हस्तियों को भी जन्म दिया। बदायूं किला और प्रतिष्ठित क्लॉक टॉवर घंटा घर प्रमुख आकर्षणों में से हैं। इल्तुतमिश और अला-उद-दीन आलम शाह जैसे शासकों की कब्रें यहीं पर हैं।

बड़े सरकार और छोटे सरकार की दरगाहों में जो मेला जुड़ता है, वैसा कम ही देखने को मिलता है। इन दरगाह में दुनिया भर से लोग आते हैं। 13वीं सदी की जामा मस्जिद , जिसे इल्तुतमिश ने बनवाया था और कादरी दरगाह, बदायूं के लोकप्रिय तीर्थस्थलों में से हैं। बदायूं में प्राचीन गौरी शंकर मंदिर भी है, यहां भारत का पहला तरल पारे और सोने के मिश्रण से बना शिवलिंग है।

बदायूं लोकसभा सीट (Budaun Lok Sabha Seat) पर इस समय भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। पिछले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में इस सीट पर संघमित्रा ने मुलायम सिंह यादव परिवार के धर्मेंद्र यादव को लोकसभा चुनाव में पराजित कर दिया था। संघमित्रा स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं। उनके पिता उस समय भारतीय जनता पार्टी में थे और स्वामी प्रसाद मौर्य BJP नेतृत्व से अपनी बेटी को टिकट दिलवाने में सफल रहे थे। लेकिन 2022 में स्थितियां बदलीं।

स्वामी प्रसाद मौर्य को लगा की हवा समाजवादी पार्टी के पक्ष में है और वह सपा में शामिल हो गए। अपने साथ कई विधायक भी ले गए। यह दावा भी किया कि आने वाले दिनों में वह बीजेपी का सफाया कर देंगे। तब संघमित्रा के एक दो बयान अपने पिता के पक्ष में जरूर आए थे। स्वामी प्रसाद मौर्य विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन खुद बुरी तरह से हार गए।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें