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Lok Sabha Elections 2024: 1985 से अब तक कोई नहीं ढहा सका मैनपुरी में सपा का किला, BJP के लिए इस बार अभी नहीं तो कभी नहीं जैसी स्थिति

Lok Sabha Elections 2024: मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी में ऐसा कब्जा जमाया कि इस पर कोई दूसरा अब तक काबिज नहीं हो सका। विरोधी भी उनके सामने पस्त हो गए। क्या होगा इस बार के लोकसभा चुनाव में? मैनपुरी के ही देवेंद्र यादव कहते हैं कि इस बार भी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी से होगी। जीतना तो समाजवादी पार्टी को ही चाहिए

Brijesh Shuklaअपडेटेड Mar 02, 2024 पर 6:15 AM
Lok Sabha Elections 2024: 1985 से अब तक कोई नहीं ढहा सका मैनपुरी में सपा का किला, BJP के लिए इस बार अभी नहीं तो कभी नहीं जैसी स्थिति
Lok Sabha Elections 2024: मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी में ऐसा कब्जा जमाया कि इस पर कोई दूसरा अब तक काबिज नहीं हो सका

Lok Sabha Elections 2024: मैनपुरी (Mainpuri), यहां पर पैदा होने वाले 'मैनपुरी तंबाकू' ने अपना झंडा देश भर में गाढ़ा। इस तंबाकू का ऐसा असर पड़ा कि मैनपुरी और उसके आसपास कैंसर मरीजों की भरमार हो गई। मैनपुरी तंबाकू को 'कपूरी' भी कहते हैं। छोटी-छोटी कटी सुपारी,इलायची, पिपरमेंट मिलकर तैयार होने वाली यह कपूरी लोगों के मुंह ऐसी लगी कि ये छुटाए नहीं छूटती। इस धरती का रुतबा ऐसा कि कोई किसी से दबना नहीं चाहता। मैनपुरी के ही सुरेंद्र सिंह चौहान कहते हैं कि यह धरती है रणवीरों की। मैनपुरी में चौहान शासकों ने शासन किया। इन्हीं शासकों की तरफ मैनपुरी में किले, मंदिरों आदि का निर्माण कराया गया। यहां पर चौहानों के अलावा यादव मतदाता भी बड़ी संख्या में है और यह लोकसभा क्षेत्र मुलायम परिवार का गढ़ भी माना जाता है।

इस मजबूत किले को कोई दूसरा नहीं तोड़ सका और आज भी यहां पर मुलायम परिवार का ही परचम लहरा रहा है। मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में कब्जा करने के लिए कांग्रेस के नेता और केंद्रीय मंत्री रहे बलराम सिंह यादव और मुलायम सिंह के समर्थकों के बीच कई बार जंग हुई। आपस में गोलियां तक चलीं। बाहुबल का इस्तेमाल हुआ। इस जंग की खबरों से अखबार रंगे रहे। इस खूनी जंग की चर्चा न सिर्फ देश भर में हुई बल्कि इसके कारण उत्तर प्रदेश विधानमंडल की बैठक कई-कई दिनों तक चल नहीं पाई।

आखिरकार मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी में ऐसा कब्जा जमाया कि इस पर कोई दूसरा अब तक काबिज नहीं हो सका। विरोधी भी उनके सामने पस्त हो गए। तमाम प्रयास किए गए, लेकिन मुलायम परिवार के किले पर कोई आंच नहीं आई। बीजेपी ने इसे तोड़ने का कई बार प्रयास किया। कई बार रणनीति बदली, लेकिन सब बेअसर सबित हुए। बार-बार बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी।

इस बार मैनपुरी में क्या होगा बदलाव?

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