Malook Nagar: UP के सबसे अमीर सांसद, इनकम टैक्स का भी पड़ा छापा, 18 साल बाद छोड़ी BSP, कौन हैं RLD में शामिल होने वाले मलूक नागर

UP Lok Sabha Election 2024: मालूक नागर (Malook Nagar) ने BSP छोड़ते हुए कहा कि वह पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर हैं। मलूक का परिवार लंबे समय से BSP का हिस्सा रहा है। वो खुद दो बार बीएसपी के टिकट पर चुनाव हारने के बाद सांसद बने, लेकिन अब उन्होंने पाला बदलने का फैसला किया है। मलूक ने साल 2006 में BSP ज्वाइन की थी और उनका नाम उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर सांसदों में आता है

अपडेटेड Apr 11, 2024 पर 2:32 PM
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UP Lok Sabha Election 2024: मालूक नागर ने BSP छोड़ते हुए कहा कि वह पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर हैं

UP Lok Sabha Election: लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती (Mayawati) और उनका बहुजन समाज पार्टी (BSP) को एक बड़ा झटका लगा है, जब बिजनौर से मौजूदा BSP सांसद मलूक नागर (Malook Nagar) ने पार्टी छोड़कर, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) का दामन थाम लिया। मलूक नागर ने दो पेज का पत्र लिख कर 'बहन जी' के सामने अपना दर्द बयां किया और पार्टी छोड़ना का कारण भी बताया। BSP के लिए मलूक नागर का जाना न सिर्फ एक राजनीतिक बल्कि एक आर्थिक झटका भी होगा, क्योंकि नागर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे करोड़पति सांसद हैं।

मलूक नागर (Malook Nagar) ने अपने दो पन्नों के पत्र में लिखा उनका परिवार करीब 39 साल से लगातार BSP का हिस्सा रहा है। इस दौरान उन्हें ब्लॉक प्रमुख, चेयरमैन, विधायक, मंत्री, सांसद और कई दूसरे अहम पदों पर रखा गया, लेकिन पहली बार वो कोई चुनाव नहीं लड़ पाए। मलूक ने साल 2006 में BSP ज्वाइन की थी और उनका नाम उत्तर प्रदेश के सबसे अमीर सांसदों में आता है।

कौन हैं मलूक नागर?


मालूक नागर हापुड़ के रहने वाले हैं। उनका जन्म 3 जुलाई 1964 में जिले के शकरपुर गांव हुआ था। उन्होंने 1980 में अपनी हाईस्कूल की पढ़ाई उपेरा में HNS कॉलेज से की, इसके बाद उन्होंने मेरठ के AS इंटर कॉलेज से अपनी इंटर की पढ़ाई पूरी की।

साल 1985 में हापुड़ के SSV डिग्री कॉलेज से उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री ली और पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बिजनेस शुरू करने का मन बना लिया।

मायावती ने मालूक नागर को 2009 में मेरठ और 2014 में बिजनौर से चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, दोनों ही चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद तीसरी बार उन्हें साल 2019 के लोकसभा चुनाव में BSP और SP ने संयुक्त रूप से बिजनौर से प्रत्याशी घोषित किया और मलूक नागर ने काफी ज्यादा वोटों के अंतर पर जीत हासिल की।

संसद में उठाए सबसे ज्यादा मुद्दे

मलूक नागर ने 17वीं संसद में सबसे ज्यादा 854 मुद्दे उठाए। मलूक उत्तर प्रदेश के बड़े कारोबारी हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के हलफनामे के मुताबिक, नागर की कुल संपत्ति लगभग 250 करोड़ रुपए हैं, इसके अलावा उनके पास 115 करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति है। अचल संपत्ति में उनकी प्रॉपर्टी और जमीन आती हैं।

इनकम टैक्स का पड़ा था छापा

उनके ऊपर 101 करोड़ रुपए का बैंक कर्ज है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने उनके और उनके भाई के खिलाफ 54 करोड़ रुपए का वसूली नोटिस भी जारी किया था। बैंक के इस नोटिस के बाद नागर के कुछ ठिकानों पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की रेड भी हुई थी।

अक्टूबर 2020 में मलूक नागर के बिजनौर वाले घर पर इनकम टैक्स के करीब 18 अधिकारियों की एक टीम ने छापा मारा था। IT विभाग ने पूरे राज्य में एक ऑपरेशन चला कर BSP नेता और उनके रिश्तेदारों के कई घरों पर छापेमारी की थी। नागर के नोएडा, गाजियाबाद और हापुड़ वाले घरों पर भी एक साथ छापेमारी की गई थी।

अब क्यों छोड़ा मायावती का साथ?

ऐसा माना जा रहा है कि मलूक नागर इस लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में पार्टी की ओर से अपना टिकट कटने से नाराज थे। क्योंकि BSP ने बिजनौर लोकसभा सीट से उनकी जगह चौधरी बिजेंद्र सिंह पर भरोसा जताया है। मालूक नागर के पत्र में भी उनकी नाराजगी का कारण साफ झलकता है।

उन्होंने लिखा, "हमारे पर‍िवार में करीब प‍िछले 39 सालों से लगातार कांग्रेस और BSP की ओर से कई बार ब्‍लॉक प्रमुख व कई बार चेयरमैन ज‍िला पर‍िषद/अध्‍यक्ष ज‍िला पंचायत व कई बार व‍िधायक (M.L.A/M.L.C) और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री व देश में सांसद लगातार रहते आ रहे हैं। इन करीब 39 सालों में पहली बार ऐसा हुआ क‍ि हम व‍िधायक भी नहीं लड़ पाए और सांसद भी नहीं लड़ पाए।"

सांसद ने आगे ल‍िखा, "हमने द‍िसंबंर 2006 में आपके आशीर्वाद से BSP पार्टी की सदस्‍यता ग्रहण की थी, आपके आशीर्वाद से हम कई पदों पर रहे, इसके ल‍िए हम हमेशा आपके आभारी रहेंगे, हमारे पर‍िवार की राज‍नीति‍क हैसि‍यत और सामाजि‍क हैस‍ियत या देश स्‍तर पर पहचान वाला कोई भी व्‍यक्‍त‍ि नहीं, जो हमारे ज‍ितना लंबा समय के ल‍िए BSP पार्टी में रहा हो, क्योंकि उसे या तो कुछ सालों में बसपा से न‍िकाल द‍िया गया या वो खुद BSP पार्टी छोड़कर चला जाता है। मैं दावे से कह सकता हूं क‍ि बसपा में मेरे पर‍िवार को इतने लंबे समय तक कई बार उतार-चढ़ाव देखने के बाद भी बसपा पार्टी में ही रहे।"

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