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तो इन 4 कारणों की वजह से यूपी में नहीं चला BJP का सिक्का, जानिए कहां हुई चूक

जब चुनाव में नेतृत्व को अहसास हुआ कि मामला गड़बड़ है और उनके सांसदों के खिलाफ गहरी नाराजगी है तब इस पर प्रयास शुरू हुए। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। समाजवादी पार्टी ने इसे जमकर भुनाया और लोगों तक यह बात पहुंचाई कि जिन सांसदों ने तुम्हारा काम नहीं किया

Brijesh Shuklaअपडेटेड Jun 05, 2024 पर 5:58 PM
तो इन 4 कारणों की वजह से यूपी में नहीं चला BJP का सिक्का, जानिए कहां हुई चूक
UP Lok Sabha Chunav 2024: आखिर यूपी में क्यों हार गई भारतीय जनता पार्टी

लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की राह में बहुत बड़ा रोड़ा साबित हुआ। यहां पर समाजवादी पार्टी ने पिछड़ा दलित और मुस्लिम समीकरण के नाम पर जो गोट चली वह अपने लक्ष्य तक पहुंच गई। और इसकी सफलता ने भारतीय जनता पार्टी को अपने बल पर लोकसभा चुनाव में बहुमत से दूर कर दिया। यह अलग बात है NDA गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में बहुमत हासिल कर लिया लेकिन उत्तर प्रदेश में इस गठबंधन को निराशा हाथ लगी। आखिर वह कौन से समीकरण थे जिसके चलते भाजपा को उत्तर प्रदेश में इतना बड़ा झटका लगा। आखिर वह कौन से कारण थे जिसको भाजपा नेतृत्व समझ पाने में असफल रहा।

उम्मीदवारों का गलत चयन

असल में सबसे प्रमुख वजह यही रही कि प्रत्याशियों का चयन मनमाने ढंग से भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व ने किया। उससे यह साफ हो गया कि भाजपा ने अपने लिए बहुत बड़ा गड्ढा खोद लिया है। ज्यादातर पुराने प्रत्याशियों को फिर से एक बार मैदान में उतार दिया और इनमें से अधिकांश वही थे जिनसे आम लोग बहुत ही नाराज थे। मतदाता किसी भी कीमत पर उन्हें देखना भी नहीं चाहते थे। यही नहीं इसकी जानकारी भाजपा नेतृत्व को थी उसके बावजूद इन लोगों को इस विश्वास से फिर से मैदान में उतार दिया गया कि लोग मोदी के नाम पर इन्हें वोट दे देंगे। यह अलग बात है कि मोदी के नाम पर वोट तो दिया लेकिन उसमें भारी कटौती भी हुई और प्रत्याशियों से नाराजगी का असर चुनाव परिणाम में दिखता है।

जहां तक प्रत्याशियों के चयन का सवाल है भाजपा के कार्यकर्ता लगातार यह गुजारिश करते रहे की पुराने प्रत्याशियों को टिकट न दिया जाए। लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने उनकी सुनी नहीं। भाजपा के एक बड़े नेता कहते हैं कि जब अहंकार से भरकर पार्टी के अंदर निर्णय होंगे तो उसके वही परिणाम आते हैं जो इस बार आए। जबकि पार्टी कार्यकर्ता की वर्तमान सांसदों से नाराजगी की जानकारी नेतृत्व को दी थी। उत्तर प्रदेश नेतृत्व ने भी केंद्रीय नेताओं से बार-बार कहा था कि जो लगातार दो बार से चुनाव जीत रहे हैं उनमें से अधिकांश अपने क्षेत्र में काफी बदनाम है और लोग उनके नाम से ही भड़क जाते हैं। इसके बावजूद नेतृत्व में लगभग सभी पुराने लोकसभा सदस्यों को टिकट दे दिया।

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