Get App

Hindenburg Effect: विदेशी निवेश को लेकर SEBI सख्त, ये नियम लाने की है तैयारी

अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने अदाणी ग्रुप की कंपनियों पर स्टॉक मैनिपुलेशन का आरोप लगाया था। अदाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों से इनकार किया था लेकिन ग्रुप की कंपनियों के शेयर झटके को संभाल नहीं सके और औंधे मुंह गिर पड़े। शेयरों के मैनिपुलेशन को रोकने के लिए सेबी ने एक प्रस्ताव पेश किया है। अब इस प्रस्ताव पर 20 जून तक कॉमेंट्स मंगाए गए हैं

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड May 31, 2023 पर 12:39 PM
Hindenburg Effect: विदेशी निवेश को लेकर SEBI सख्त, ये नियम लाने की है तैयारी

Hindenburg Effect: बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) को लेकर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें देश में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी होल्डिंग वाले विदेशी निवेशकों को ज्यादा जानकारी देनी होगी। सेबी के इस कदम का मकसद न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में गड़बड़ी को रोकना है। इसके अलावा सेबी ने यह नियम इसलिए तैयार किया है ताकि भारतीय कंपनियों के टेकओवर के लिए FPI रूट के गलत इस्तेमाल को रोका जा सके। सेबी के इस पेपर के मुताबिक हाई रिस्क वाले FPIs की पहचान के लिए पारदर्शिता के मानकों को बढ़ाए जाने की जरूरत है।

इन्हें हाई, मॉडेरेट और लो रिस्क की कैटेगरी में बांटा जाएगा। जिन FPIs की एक ही कॉरपोरेट ग्रुप में 50 फीसदी से अधिक इक्विटी एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) है, उन्हें अतिरिक्त खुलासे करने होंगे। इस पेपर पर सेबी ने 20 जून 2023 तक प्रतिक्रियाएं मंगाया है।

एक ही ग्रुप में निवेश करने से क्या है रिस्क

सेबी के मुताबिक कुछ FPIs अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा एक ही कंपनी या एक ग्रुप में रखते हैं। कुछ मामलों में तो यह होल्डिंग लॉन्ग टाइम तक बनी रहती है। इस प्रकार के निवेश से आशंका बढ़ती है कि कॉरपोरेट ग्रुप एफपीआई के रास्ते से मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों को पूरा करने की कोशिश कर रहा है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें