एक्सपर्ट्स को सबसे अधिक यह शेयर पसंद, आपके पोर्टफोलियो में है या नहीं?

मजबूत इकनॉमिक ग्रोथ, कर्ज में उछाल और कैपिटल एक्सपेंडिचर में तेजी के चलते पिछले महीने बैंकिंग, बीमा और इंफ्रा कंपनियां एनालिस्ट्स की टॉप की पसंद बनी रहीं। वहीं वैश्विक और घरेलू स्तर पर चुनौतियों के चलते आईटी और फार्मा शेयरों को लेकर उनका रुझान निगेटिव रहा। अब इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो निफ्टी के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी की रेटिंग ICICI बैंक को मिली

अपडेटेड Jan 03, 2024 पर 4:11 PM
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दिसंबर 2022 में Bajaj Finance को खरीदारी की 20, होल्ड की 4 और सेल की 6 कॉल मिली थी। एक साल बाद खरीदारी की कॉल उछलकर 27 हो गई जो निफ्टी 50 के शेयरों में सबसे तेज उछाल रही।
     
     
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    मजबूत इकनॉमिक ग्रोथ, कर्ज में उछाल और कैपिटल एक्सपेंडिचर में तेजी के चलते पिछले महीने बैंकिंग, बीमा और इंफ्रा कंपनियां एनालिस्ट्स की टॉप की पसंद बनी रहीं। वहीं वैश्विक और घरेलू स्तर पर चुनौतियों के चलते आईटी और फार्मा शेयरों को लेकर उनका रुझान निगेटिव रहा। अब इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो निफ्टी के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी की रेटिंग ICICI बैंक को मिली और 48 बाय कॉल इसे मिली जबकि इसके बाद SBI को 47 और इंडसइंड बैंक को खरीदारी की 45 कॉल मिली। वहीं दूसरी तरफ सबसे अधिक सेल रेटिंग विप्रो को मिली और इसे ब्रोकरेज ने 17 सेल कॉल दी, डिविस लैब को 16, टेक महिंद्रा को 16 और एशियन पेंट्स को 15 सेल कॉल मिली।

    Nifty पर सबसे अधिक भरोसा ICICI Bank पर

    रिटेल और एसएमई सेगमेंट के दम पर क्रेडिट ग्रोथ की हेल्दी स्पीड के चलते BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस) सेक्टर के लिए यह वित्त वर्ष काफी मजबूत रहा है। एक्सिस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर बैंकों में लोन की ग्रोथ मजबूत रही। हालांकि ब्रोकरेज का मानना है कि मार्जिन पर दबाव आगे भी बना रहेगा और फंड की लागत हाई बनी रहेगी। इस वित्त वर्ष में अधिकतर बैंकों का नेट इंटेरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछले वित्त वर्ष के लगभग बराबर या उससे कम रह सकता है।


    ब्रोकरेज के मुताबिक पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड रिसीवेबल्स की अनसिक्योर्ड लेंडिंग कैटेगरीज का रिस्क वेट RBI ने बढ़ा दिया है जो नियर टर्म में इन सेगमेंट में ग्रोथ सुस्त कर सकती है। हालांकि इस वित्त वर्ष में एसेट क्वालिटी और क्रेडिट कॉस्ट से जुड़ी कोई चिंता की बात नहीं है। यह ICICI बैंक के सितंबर तिमाही के नतीजे में दिखा और इसका स्टैंडएलोन प्रॉफिट सालाना आधार पर 35.5 फीसदी उछलकर 10261 करोड़ रुपये पर पहुंच गया और नेट इंटेरेस्ट इनकम 24 फीसदी बढ़ गया।

    घरेलू ब्रोकरेज जियोजीत के मुताबिक सितंबर तिमाही में इसका प्रदर्शन बेहतर रहा और अब एडवांसेज और डिपॉजिट्स में आगे भी अच्छी ग्रोथ के आसार हैं। ब्रोकरेज के मुताबिक डाइवर्सिफाइड लोन पोर्टफोलियो, हेल्दी एसेट क्वालिटी, डिजिटल क्षमताओं और पर्याप्त पूंजी के दम पर बैंक का परफॉरमेंस आगे बेहतर रहने की उम्मीद है।

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    Bajaj Finance पर सबसे अधिक भरोसा

    दिसंबर 2022 में बजाज फाइनेंस को खरीदारी की 20, होल्ड की 4 और सेल की 6 कॉल मिली थी। एक साल बाद खरीदारी की कॉल उछलकर 27 हो गई जो निफ्टी 50 के शेयरों में सबसे तेज उछाल रही। बजाज फाइनेंस के वित्तीय सेहत की बात करें तो नेट इंटेरेस्ट इनकम (NII) में सुधार, नए लोन और ग्राहक जोड़ने में तेजी के दम पर सितंबर तिमाही में इसका कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 28 फीसदी उछलकर 3551 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके लोनबुक का 40 फीसदी हिस्सा अनसिक्योर्ड कंज्यूमर लेंडिंग है लेकिन फिर भी इसकी एसेट क्वालिटी बेहतर है और सितंबर तिमाही में ग्रॉस एनपीए 0.91 फीसदी और नेट एनपीए 0.31 फीसदी रहा। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 33 फीसदी उछलकर 2.9 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    हालांकि नवंबर में RBI ने इसे ईकॉम और इंस्टा ईएमआई कार्ड के जरिए लोन बांटने से रोककर तगड़ा झटका दिया। इंस्टा ईएमआई कार्ड से ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों प्रकार से 2 लाख रुपये तक की खरीदारी के लिए प्री-अप्रूव्ड लोन मिल जाता है। वहीं ईकॉम फ्लेक्सी पर्सनल और अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन के लिए है। इन दोनों कार्ड के जरिए लोन बांटने पर रोक से कंपनी को झटका तो लगा है लेकिन एनालिस्ट्स का मानना है कि इसका सीमित ही असर पड़ेगा क्योंकि इंस्टा ईएमआई कार्ड की इसके लोन डिस्बर्समेंट में 1 फीसदी से भी कम हिस्सेदारी है। कंपनी ने भी नियमों के पालन से जुड़े मामले को सुलझाने का संकेत दिया है।

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    जेफरीज का मानना है कि आरबीआई के फैसले का बजाज फाइनेंस पर खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि इसके टोटल क्लाइंट्स में इंस्टा ईएमआई कार्ड बेस सिर्फ 5 फीसदी ही है। ब्रोकरेज के मुताबिक RBI का यह कदम निगेटिव तो है लेकिन यह अपने प्रोडक्ट्स को कितनी जल्द एडजस्ट करती है, यह देखने लायक होगा। एक और ब्रोकरेज सीएलएसए का मानना है कि यह मुद्दा एक से दो तिमाहियों में सुलझ जाना चाहिए लेकिन अगर यह बैन लगा रहता है तो मुनाफे पर इसका करीब 6 फीसदी ही असर पड़ सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक यह बड़े उल्लंघन की बजाय ऑपरेशनल ब्रीच का मामला है।

    Wipro को सबसे अधिक सेल कॉल

    ब्रोकरेज ने जिन शेयरों को सेल लिस्ट में रखा, उसमें आधे से अधिक आईटी सेक्टर के रहे। आईटी सेक्टर के लिए सबसे बड़े मार्केट अमेरिका और यूरोप हैं, और यहां इनकी सुस्त ग्रोथ ने इन पर दबाव बनाया। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में इनका रेवेन्यू तिमाही आधार पर महज 1 फीसदी के आस-पास ही बढ़ा लेकिन मजबूत डील विन उम्मीद भी बनाए हुए है। अब बात करें एनालिस्ट्स के रुझान की तो सबसे अधिक सेल कॉल विप्रो को मिली है।

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    मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक पिछली छह तिमाहियों में इसका कारोबार ढीला रहा है जबकि उसके पहले जुलाई 2020 में थिएरी डेलापोर्ट के सीईओ बनने के बाद वित्त वर्ष 2022 कंपनी के लिए काफी मजबूत रहा था। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस) और कंज्यूमर में मांग सुस्त होने के साथ-साथ डिस्क्रेशनरी कंसल्टिंग वर्टिकल पर हाई एक्सपोजर के चलते विप्रो के ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर दबाव डाला। हालांकि ब्रोकरेज का यह भी कहना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बड़े सौदे हासिल करने से यह संकेत मिल रहा है कि कंपनी की स्ट्रैटेजी बेहतर साबित हो रही है।

    ब्रोकरेज के मुताबिक मैक्रो लेवल पर स्थिति कब तक सही होगी, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है लेकिन महंगाई दर में सुस्ती, कम ब्याज दरों से डिस्क्रेशनरी स्पेंड्स को प्रोत्साहन मिल सकता है। ब्रोकरेज के मुताबिक विप्रो का कंसल्टिंग एक्सपोजर काफी हाई है, रेवेन्यू का 15 फीसदी तो मांग पटरी पर आने पर इसे तगड़ा फायदा मिल सकता है।

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