बैकिंग शेयरों में कोहराम! बैंक निफ्टी 2% से अधिक टूटा, PSU बैंकों के शेयरों में भारी गिरावट

Bank Nifty falls: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का असर आज 4 मार्च को भारतीय बैकिंग शेयरों पर भी देखने को मिला। कारोबार के दौरान बैंक निफ्टी इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक गिर गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और ग्लोबल लेवल पर फैली अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में बिकवाली तेज कर दी है

अपडेटेड Mar 04, 2026 पर 3:28 PM
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Bank Nifty falls: बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर करीब 5 प्रतिशत तक गिर गए।

Bank Nifty falls: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग का असर आज 4 मार्च को भारतीय बैकिंग शेयरों पर भी देखने को मिला। कारोबार के दौरान बैंक निफ्टी इंडेक्स 2 प्रतिशत से अधिक गिर गया। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और ग्लोबल लेवल पर फैली अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने बैंकिंग शेयरों में बिकवाली तेज कर दी है।

सुबह 11:15 बजे के करीब, बैंक निफ्टी करीब 2 प्रतिशत गिरकर 58,635.75 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स और निफ्टी भी लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे ट्रेड कर रहे थे।

PSU बैंक शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

सरकारी बैंकों के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली। बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर करीब 5 प्रतिशत तक गिर गए। कैनरा बैंक में लगभग 4.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया करीब 4.2 प्रतिशत तक फिसल गया। वहीं, निफ्टी के बड़े बैंकिंग शेयर भी दबाव में रहे। HDFC Bank लगभग 1.1 प्रतिशत और ICICI Bank करीब 1.7 प्रतिशत नीचे कारोबार करते दिखे।


रुपये में रिकॉर्ड गिरावट

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के असर से भारतीय करेंसी भी दबाव में आ गई। बुधवार को रुपया पहली बार 92 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के पार कमजोर हो गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 92.17 तक गिर गया, जो करीब 0.7 प्रतिशत की गिरावट दिखाता है। इससे पहले जनवरी में रुपया 91.9875 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंचा था।

ट्रेडरों के अनुसार, रुपये में और बड़ी गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है।

तेल की कीमतों में तेज उछाल

मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण ग्लोबल लेवल पर एनर्जी की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव 1.4 प्रतिशत बढ़कर 82.57 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। मंगलवार को यह जनवरी 2025 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था। पिछले चार दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 17 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है।

क्रूड की ऊंची कीमतें भारत जैसे बड़े खरीदार देशों के लिए चिंता का विषय हैं। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत क्रूड ऑयल विदेशों से आयात करता है।

इकोनॉमी और बाजार पर संभावित असर

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट्स, वीके विजयकुमार के मुताबिक, “युद्ध के बढ़ने और कच्चे तेल के महंगे होने से बाजार में अनिश्चितता का दौर शुरू हो गया है। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता महंगाई और आर्थिक ग्रोथ पर उसका असर है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो व्यापार घाटा बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आएगा और कॉरपोरेट मुनाफे पर असर पड़ सकता है।”

मैक्वरी के एनालिस्ट्स का भी कहना है कि तेल की कीमतों में उछाल से भारत का चालू खाता घाटा, राजकोषीय घाटा और महंगाई बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर और दबाव पड़ने की आशंका है।

आगे क्या?

टेक्निकल एनालिस्ट्स का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए निकटतम सपोर्ट 59,000 से 58,700 के बीच देखा जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो बैंकिंग शेयरों में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

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