13 मार्च 2012 को BSE SME Exchange की लॉन्चिंग के साथ अब तक इस एक्सचेंज पर 359 छोटी और मझोली कंपनियां लिस्ट हुई हैं और इन्होंने बाजार से 3,800 करोड़ रुपये का फंड जुटाया है। वर्तमान में इनका नेट मार्केट कैपिटल 52,000 करोड़ रुपये के आसपास है। एक दशक की समयावधि में BSE SME Exchange द्वारा दिया गया ग्रॉस लेवल इस्टीमेटेड रिटर्न 3.4 के स्तर पर रहा है। इसका मतलब यह है कि अगर किसी निवेशक ने इस साल 10 की अवधि में 1 रुपये का निवेश किया होगा तो उसको 3.4 रुपये मिले होंगे। वास्तव में BSE SME Exchange पर हुई अधिकांश लिस्टिंग पिछले 5 साल में हुई है। अब इस आधार पर देखें तो BSE SME का वास्तविक रिटर्न 3.4 के स्तर से कहीं ज्यादा रहा है।
BSE Ltd ने BSE SME प्लेटफॉर्म की स्थापना भारत भर में फैली असंगठित क्षेत्र की छोटी मझोली कंपनियों को लिस्टिंग की सुविधा देने के लिए की थी जिससे की वह रेगुलेटडेट और संगठित क्षेत्र की कंपनियां बन सकें।
BSE SME Exchange के हेड अजय ठाकुर ने Livemint से हुई बातचीत में कहा कि इस एक दशक के समय में 359 BSE SMEs कंपनियों ने करीब 3800 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस अवधि में इनका एवरेज ग्रॉस लेवल इस्टीमेटेड रिटर्न 3.4 के आसपास रहा है। यह मर्चेंट बैंकरों की उस नई पीढ़ी की कोशिश का परिणाम था जो अपने नेटवर्क में छोटी टिकट साइज की कंपनियों को शामिल करने के लिए तैयार हैं।
इसके अलावा पिछले 1 दशक में एक्सचेंज ऐसे छोटे दिग्गज निवेशकों को अपनी तरफ आर्कषित करने में सफल रहा है जो छोटी कंपनियों में निवेश करने और मुनाफे में आने के लिए लिस्टिंग के बाद 2-3 साल इंतजार करने के लिए तैयार हैं। उनके 1 करोड़ रुपये लेकर 5 करोड़ रुपये तक के इन्वेस्टमेंट ने लिस्टेड SMEs स्टॉक को तेज गति से ग्रोथ करने में सहायता दी है। जिसके चलते ये लिस्टेड SME कंपनियां अपने निवेशकों को शानदार रिटर्न देने में सफल रही हैं।
2021 में तमाम SME स्टॉक मल्टीबैगर की श्रेणी में शामिल होते नजर आए हैं। जिसको देखते हुए हम कह सकते हैं बीएसई SME एक्सचेंज में नए तरह के मर्चेंट बैकर और बड़ी मात्रा में दिग्गज माइक्रो इन्वेस्टर बनाए हैं जो SME सेक्टर के राकेश झुनझुनावाला, डॉली खन्ना और आशीष कोचालिया कहे जा सकते हैं।