सरकार को अगले बजट में पूंजीगत खर्च बढ़ाने और फिस्कल कंसॉलिडेशन के बीच संतुलन बनाए रखने में ज्यादा दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने यह अनुमान जताया है। आरबीआई से मिला डिविडेंड और शानदार टैक्स कलेक्शन इसकी वजह है। फिस्कल कंसॉलिडेशन के लिए सरकार के पास करीब 40-50 बेसिस प्वाइंट्स की गुंजाइश है। इससे सरकार को कई मकसद पूरे करने में मदद मिलेगी। सरकार पूंजीगत खर्च बढ़ाने के साथ ही सामाजिक योजनाओं पर ज्यादा खर्च कर सकेगी।
इन सेक्टर्स पर बढ़ सकता है फोकस
विदेशी ब्रोकरेज फर्म Jefferies का मानना है कि बजट में एफोर्डेबल हाउसिंग, पूंजीगत खर्च, कंज्यूमर कंपनियों और इंटरेस्ट रेट के प्रति संवेदनशील सेक्टर्स के लिए ऐलान हो सकते हैं। हालांकि, आईटी और फार्मा सेक्टर पर बजट का फोकस कम हो सकता है। इनकम टैक्स कलेक्शन बढ़ने और फिस्कल स्पेस उपलब्ध होने से सरकार इनकम टैक्स में कमी कर सकती है। इससे टैक्सपेयर्स को काफी राहत मिलेगी। साथ ही कंज्यूमर स्पेंडिंग बढ़ने से इकोनॉमिक ग्रोथ में तेजी आएगी।
वेल्फेयर स्कीम पर 50,000 करोड़ बढ़ सकता है खर्च
ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि सरकार फिर से शहरी क्षेत्रों के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम का ऐलान कर सकती है। कैपिटल एक्सपेंडिचर के बजट को 30,000 करोड़ रुपये बढ़ाया जा सकता है। इस साल 1 फरवरी को पेश अंतरिम बजट में यह 11.11 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। जेफरीज का मानना है कि सरकार वेल्फेयर स्कीम पर खर्च 50,000 करोड़ रुपये बढ़ा सकती है। साथ ही सरकार कर्ज लेने के अपने लक्ष्य में भी कमी कर सकती है।
कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव की उम्मीद नहीं
अगले महीने पेश होने वाले बजट में टुबैको इंडस्ट्री खासकर ITC को अच्छी खबर मिल सकती है। टुबैको टैक्स में 5-7 फीसदी इजाफा हो सकता है। उधर, F&O ट्रेडिंग के नियमों को सरकार सख्त बनाने का ऐलान कर सकती है। लेकिन, ब्रोकरेज फर्म को कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव नहीं होने का अनुमान है।
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जुलाई में आएगा यूनियन बजट
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण अगले महीने के तीसरे हफ्ते में नई एनडीए सरकार का पहला बजट पेश कर सकती हैं। बजट से पहले वह इकोनॉमी और इंडस्ट्री के अलग-अलग प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात कर बजट के बारे में उनकी राय जानने की कोशिश कर रही हैं।