Budget 2026 Expectations :मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में एम्बिट एसेट मैनेजमेंट के फंड मैनेजर-इक्विटी, त्रिलोक अग्रवाल ने कहा कि थ्री C's यानी कंजम्पशन बूस्ट, फिस्कल कंसोलिडेशन और कैपेक्स को बैलेंस करना FY27 के बजट के लिए मुख्य थीम हो सकती है। उनका मानना है कि FY27 में EPS ग्रोथ मिड-टीन्स के बजाय लो डबल-डिजिट में होगी, जिससे अर्निंग में तेज़ी के बजाय नॉर्मलाइज़ेशन की उम्मीद है। उनके मुताबिक अगले फाइनेंशियल ईयर में फाइनेंस और कंजम्पशन सेक्टर में बेहतर ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
टैरिफ की चिंताओं और चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव को देखते हुए, यूनियन बजट में बड़ी बातें क्या हो सकती हैं?
फिस्कल डिसिप्लिन और मज़बूती एक खास बात होगी। इस पर फोकस रहेगा। उम्मीद है कि सरकार ज़्यादा कर्ज़ के स्तर के बावजूद अपने राजकोषीय मज़बूती के रास्ते पर टिकी रहेगी। थ्री C's यानी कंजम्पशन बूस्ट, फिस्कल कंसोलिडेशन और कैपेक्स को बैलेंस करना FY27 के बजट के लिए मुख्य थीम हो सकती है।
क्या आपको लगता है कि सरकार यूनियन बजट में कैपिटल गेन्स पॉलिसी में बदलाव कर सकती है?
हमें आने वाले बजट में कैपिटल गेन्स टैक्स में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है।
क्या आपको FY26 और FY27 में खपत में बढ़त आने का भरोसा है?
GST रैशनलाइज़ेशन और इनकम टैक्स देने वालों को मिलने वाली राहत का FY26 और FY27 में कंजम्पशन पर असर पड़ेगा। दूसरे फैक्टर्स अहम फैक्टर ये हैं कि ग्रामीण मांग में सुधार होने की उम्मीद है और यह स्थिर रहेगी (अच्छे मॉनसून की वजह से)। शहरी रोज़गार में भी सुधार होता दिख रहा है।
FY27 में 15-16 प्रतिशत अर्निेग ग्रोथ की उम्मीद को देखते हुए, आप किन सेक्टर्स को इस ग्रोथ का मुख्य ड्राइवर मानते हैं?
हमारा मानना है कि FY27 में EPS ग्रोथ मिड-टीन्स के बजाय कम डबल-डिजिट में होगी, जिससे ग्रोथ में तेज़ी के बजाय नॉर्मलाइज़ेशन की उम्मीद है। अगले फाइनेंशियल ईयर में फाइनेंशियल और कंजम्पशन सेक्टर में बेहतर ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
क्या आप डिफेंस स्टॉक्स पर दांव लगा रहे हैं और क्या आपको इस सेक्टर में मज़बूत अर्निंग ग्रोथ की उम्मीद है?
पूरी दुनिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल जोखिमों को देखते हुए डिफेंस अब सिर्फ़ एक थीम नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। सरकार के स्वदेशीकरण और डिफेंस पर ज़्यादा आवंटन पर फोकस करने से इस सेक्टर की ग्रोथ जारी रहेगी। हम इस सेक्टर में सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं।
क्या आपको लगता है कि रुपये में हाल की तेज़ गिरावट के लिए सिर्फ़ ग्लोबल फ़ैक्टर ही ज़िम्मेदार हैं?
ग्लोबल फ़ैक्टर को इस गिरावट का मुख्य कारण माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अनिश्चित और सज़ा देने वाले टैरिफ ने भी रुपए को कमज़ोर किया है।
क्या आपको अगले कुछ सालों में मज़बूत प्राइवेट कैपेक्स की संभावना दिखती है, और क्या आप कैपिटल गुड्स में नया निवेश करने पर विचार करेंगे?
सरकार ने सालों तक इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर पब्लिक खर्च करके बड़ा काम किया है। इस बीच प्राइवेट सेक्टर के कैपेक्स में भी सुधार के कुछ संकेत दिखाई दिए हैं। हालांकि अभी यह बड़े पैमाने पर नहीं हुआ है। हमें लगता है कि मज़बूत ग्रोथ में अभी कुछ समय लगेगा,क्योंकि यूटिलाइज़ेशन लेवल अभी भी 74-75 प्रतिशत के आसपास हैं।
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