Budget 2026: बजट में एलटीसीजी और एसटीटी में राहत मिली तो शेयर मार्केट में लौट सकती है रौनक

शेयर बाजार पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ने का काफी असर पड़ा है। सरकार ने पिछले यूनियन बजट में इसे बढ़ाकर दोगुना कर दिया था। ऑप्शन के सेल पर एसटीटी का रेट 0.0625 फीसदी से बढ़ाकर ऑप्शन प्रीमियम का 0.1 फीसदी कर दिया गया था। फ्यूचर्स ट्रेड्स पर इसे 0.0125 फीसदी (ट्रेडेड वैल्यू का) से बढ़ाकर 0.02 फीसदी कर दिया गया था

अपडेटेड Jan 12, 2026 पर 6:31 PM
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STT की शुरुआत 2004 में हुई थी, जब एलटीसीजी नहीं लगता था।

शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों को डरा दिया है। नए साल के दूसरे दिन निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया था। उसके बाद मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिली। ऐसे में मार्केट यूनियन बजट 2026 को उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वित्त मंत्री इनवेस्टर्स के लिए राहत का ऐलान बजट में करती हैं तो इससे मार्केट में रौनक लौट सकती है।

एसटीटी बढ़ने का बाजार पर असर

शेयर बाजार पर सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ने का काफी असर पड़ा है। सरकार ने पिछले यूनियन बजट में इसे बढ़ाकर दोगुना कर दिया था। ऑप्शन के सेल पर एसटीटी का रेट 0.0625 फीसदी से बढ़ाकर ऑप्शन प्रीमियम का 0.1 फीसदी कर दिया गया था। फ्यूचर्स ट्रेड्स पर इसे 0.0125 फीसदी (ट्रेडेड वैल्यू का) से बढ़ाकर 0.02 फीसदी कर दिया गया था। इसका काफी असर एफएंडओ के ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ा था।


सरकार ने कैपिटल गेंस टैक्स भी बढ़ाया

सरकार ने लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) को भी 10 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया था। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस को 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया था। ब्रोकरेज फर्मों और म्यूचुअल फंड हाउसेज का कहना है कि टैक्स का बोझ बढ़ने से मार्केट-लिंक्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी घटी है। लेकिन, सबसे ज्यादा असर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ने का पड़ा है। इसकी शुरुआत 2004 में हुई थी, जब एलटीसीजी नहीं लगता था।

एसटीटी का मकसद पूरा हो चुका है

सरकार का यह मानना था कि एसटीटी एक आसान, कम रेट वाली लेवी है, जो कैपिटल गेंस टैक्स का विकल्प हो सकता है। साथ ही इससे सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन को ट्रैक करने में मदद मिलेगी। लेकिन, दो दशक के बाद एसटीटी पर सवाल उठने लगे हैं। सिरील अमरचंद मंगलदास के पार्टनर कुणाल सवानी ने कहा, "जिस मकसद से एसटीटी को लागू किया गया था, वह अब पूरा हो चुका है। अब डीमैटेरिलाइजेशन, एक्सचेंज के लेवल पर रिपोर्टिंग और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) से एसटीटी की जरूरत नहीं रह गई है। "

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अभी इनवेस्टर्स को देना पड़ रहा दो बार टैक्स

सिंघानिया एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर रोहित जैन ने कहा कि एसटीटी का मामला पॉलिसी सर्किल से निकलकर कोर्टरूम में पहुंच गया है। उन्होंने कहा, "एसटीटी की वैधता का मसला अभी कोर्ट के तहत है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।" उन्होंने कहा कि एसटीटी की वजह से दो बार टैक्स लगता है, क्योंकि अब एलटीसीजी टैक्स दोबारा शुरू हो गया है। एसटीटी प्रॉफिट की जगह ट्रांजेक्शन वैल्यू पर लगता है। अगर सरकार यूनियन बजट में इस बारे में राहत देती है तो इसका मार्केट पर पॉजिटिव असर पड़ेगा।

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