FII लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो घटकर केवल 15 फीसदी रह गया है, जो हाल के समय में सबसे कम है। एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल एंड डेरिवेटिव रिसर्च हेड सुदीप का कहना है कि पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि जब भी एफआईआई लॉन्ग-शॉर्ट अनुपात 15 फीसदी के नीचे जाता है तो बाजारों में अक्सर सीमित गिरावट देखने को मिली है। सुदीप शाह ने आगे कहा कि FII के वर्तमान लॉन्ग-शॉर्ट अनुपात से उनके मंदी के रुख का स्पष्ट संकेत मिलता है। लेकिन उनके बेहद कम लॉन्ग-शॉर्ट अनुपात से यह भी संकेत मिलता है कि बाजार इसके खराब प्रभाव का अधिकांश हिस्सा पहले ही पचा चुका है। ऐसे में अगर कोई पॉजिटिव ट्रिगर दिखता है तो बाजार में उछाल देखने को मिल सकता है।
