Crude Oil Impact: क्रूड का दाम बढ़ने से किन शेयरों में गिरावट का खतरा और किन्हें होगा फायदा? देखें पूरी लिस्ट

Crude Oil Impacts: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत का उछाल देखा गया और कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। भारत जैसे क्रूड इंपोर्ट पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति अर्थव्यवस्था और कई इंडस्ट्रीज के लिए चिंता का विषय बन सकती है

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 10:45 AM
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Crude Oil Impacts: कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पेंट कंपनियों के लिए भी चुनौती बन सकती है

Crude Oil Impacts: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत का उछाल देखा गया और कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं। भारत जैसे क्रूड इंपोर्ट पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति अर्थव्यवस्था और कई इंडस्ट्रीज के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकतर कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए क्रूड की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर कई कंपनियों और सेक्टरों के कारोबार पर सीधे पड़ता है। आइए समझते हैं कि क्रूड का दाम बढ़ने से किन कंपनियों को फायदा हो सकता है और किन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

1. अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा

तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा फायदा अपस्ट्रीम कंपनियों को होता है। ONGC और ऑयल इंडिया जैसी कंपनियां कच्चे तेल के उत्पादन से जुड़ी हैं, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी से उनकी आय बढ़ती है। अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर की बढ़ोतरी से इन कंपनियों के सालाना रेवेन्यू में लगभग 300 से 400 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त लाभ हो सकता है।


2. OMC कंपनियों पर दबाव

दूसरी ओर, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल जैसी कंपनियों के लिए कच्चा तेल इनका मुख्य कच्चा माल है। कीमतें बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ती है, जिससे उनके मार्जिन और कारोबारी प्रदर्शन पर दबाव आता है।

सूत्रों के मुताबिक सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में बढ़ोतरी नहीं करना चाहती। ऐसे में बढ़ी हुई लागत का बोझ इन कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है।

3. पेंट कंपनियों के लिए भी चुनौती

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी पेंट कंपनियों के लिए भी चुनौती बन सकती है। पेंट को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई रसायन और कच्चे माल, पेट्रोकेमिकल से जुड़े प्रोडक्ट होते हैं। ऐसे में इनके दाम सीधे तौर पर क्रूड की कीमतों से जुड़ा होता है।

एनालिस्ट्स का कहना है कि करीब चार साल बाद पेंट इंडस्ट्री में लागत से जुड़ी महंगाई फिर से लौट सकती है। लागत बढ़ने की स्थिति में कंपनियों को कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे मांग और बिक्री की गति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स के लिए अपने टारगेट कम किए हैं।

4. एविएशन कंपनियों की लागत बढ़ेगी

एविएशन सेक्टर भी तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स में से एक है। एयरलाइंस कंपनियों के लिए एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF), उनकी लागत का एक बड़ा हिस्सा होता है। इंटरग्लोब एविएशन (Indigo) जैसी एयरलाइन कंपनियां पहले ही पश्चिम एशिया में तनाव के कारण उड़ानों के संचालन में बाधा का सामना कर रही हैं। इसके साथ ही कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और कमजोर होता रुपया इन कंपनियों की लागत और मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

5. टायर कंपनियों पर भी असर

टायर इंडस्ट्री भी कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होता है क्योंकि टायर को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का बड़ा हिस्सा पेट्रोकेमिकल आधारित होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण टायर कंपनियों की कच्चे माल की लागत पहले ही 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है।

टायर इंडस्ट्री का लगभग 45 फीसदी कच्चा माल, क्रूड से जुड़ा हुआ होता है। इसके साथ ही प्राकृतिक रबर की बढ़ती कीमतें और कमजोर रुपया भी कंपनियों के मार्जिन और मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो अपोलो टायर्स, MRF और JK टायर जैसी कंपनियों के कैश फ्लो पर दबाव पड़ सकता है।

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