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Daily Voice: इक्विरस के वेंकटराघवन को शेष कैलेंडर ईयर में लगभग 50000 करोड़ रुपये के आईपीओ आने की उम्मीद

Daily Voice:वित्त वर्ष 2023 में,LIC IPO के बाद प्राथमिक बाजार में सुस्ती थी। लेकिन अब बाजार में फिर से तेजी आ रही है। एफआईआई भी भारतीय शेयरों में निवेश करने के लिए लौट आए हैं। आमतौर पर प्राइमरी मार्केट सेकेंडरी मार्केट से कुछ महीनों पीछे रहता है। ऐसे में सेंकेडरी मार्केट में आई हाल की तेजी के बाद अब कुछ ही समय हमें प्राइमरी मार्केट भी तेजी पकड़ता दिखेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 29, 2023 पर 10:38 AM
Daily Voice: इक्विरस के वेंकटराघवन को शेष कैलेंडर ईयर में लगभग 50000 करोड़ रुपये के आईपीओ आने की उम्मीद
वेंकटराघवन एस ने कहा कि बाजार का ओवर ऑल ट्रेंड पॉजिटिव है। हाल के दिनों में महंगाई कम हुई है। एफआईआई एक बार फिर से भारतीय बाजार का रुख कर रहे हैं। चीन प्लस वन रणनीति भी वास्तविकता में बदलती दिख रही है। ये सब बाजार के लिए शुभ संकेत हैं

इक्विरस (Equirus) में निवेश बैंकिंग के प्रबंध निदेशक वेंकटराघवन एस (Venkatraghavan S) का कहना है कि मानसून की चाल यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में बाजार की चाल कैसी रहेगी। हालांकि उनका ये भी मानना है बाजार का ओवर ऑल ढ़ाचा पॉजिटिव बना हुआ है। मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में उन्होंने ये भी कहा कि ग्लोबल मैक्रो बातावरण और ग्लोबल मंदी की स्थिति शेष कैलेंडर वर्ष में भारत में निवेश की दिशा तय कर सकती है। निवेश बैंकिंग सेक्टर में 25 सालों से ज्यादा का अनुभव रखने वाले वेंकटराघवन को अगले 6 महीनों में आईपीओ बाजार की गतिविधि में थोड़ी तेजी आने की उम्मीद है। उम्मीद है कि शेष बचे साल में आईपीओ के जरिए करीब 50000 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इसका अधिकांश हिस्सा कैलेंडर ईयर 2023 के शेष महीनों में आ सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि वित्त वर्ष 2023 में,LIC IPO के बाद प्राथमिक बाजार में सुस्ती थी। लेकिन अब बाजार में फिर से तेजी आ रही है। एफआईआई भी भारतीय शेयरों में निवेश करने के लिए लौट आए हैं। आमतौर पर प्राइमरी मार्केट सेकेंडरी मार्केट से कुछ महीनों पीछे रहता है। ऐसे में सेंकेडरी मार्केट में आई हाल की तेजी के बाद अब कुछ ही समय हमें प्राइमरी मार्केट भी तेजी पकड़ता दिखेगा। ध्याम रखने की बात है कि 2024 में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में वित्त वर्ष 2024 की चौथी तिमाही में बाजार में निवेशक सतर्कता के साथ निर्णय लेंगे जिससी वजह से बाजार में बीच-बीच में वोलैटिलिटी के दौर भी देखने को मिलेंगे।

हमने एसएमई सेगमेंट में आईपीओ की बाढ़ देखी है। इस सेगमेंट के आईपीओ पर आपकी राय क्या है? इसका जवाब देते हुए वेंकटराघवन एस ने कहा कि एसएमई सेगमेंट अपेक्षाकृत नया है। एसएमई सेगमेंट में आईपीओ की संख्या में लगातार हो रही बढ़त इस प्लेटफार्म के निरंतर विकास का प्रमाण है। चूंकि इस सेगमेंट के नियम इतने कड़े नहीं हैं। ऐसे में समय के साथ एसएमई आईपीओ के जरिए पूंजी बाजार तक पहुंचने वाली कंपनियों में काफी विविधता रही है। साथ ही इनकी गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। इसकी वजह से एसएमई सेगमेंट के आईपीओ में निवेशकों की रुचि बढ़ी है। एमएमई आईपीओ प्लेटफार्म पर हमें तमाम मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां पूंजी जुटाती नजर आई हैं। भारत सरकार की तरफ से मेक इन इंडिया को मिल रहे पुश के चलते इसमें और बढ़त देखने को मिल सकती है।

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