आरबीआई MPC की बैठक 6-8 दिसंबर को होगी जिसमें मौद्रिक नीति के ब्लू प्रिंट की समीक्षा की जाएगी। आरबीआई ने अपने मौद्रिक नीतियों को नरम बनाए रखा है और कोरोना के मार से जूझ रही इकोऩॉमी को उबारने और ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों को निम्नतम स्तर पर बनाए रखा है।
Equirus के आशुतोष तिवारी का कहना है कि उम्मीद है कि इस बार आरबीआई रेपो और रिवर्स रेपो रेट के बीच के अंतर को कम करेगा और इसके लिए रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। सामान्य तौर पर यह अंतर 25 बेसिस प्वाइंट का होता है किंतु आरबीआई ने कोविड-19 के दौरान के अंतर 65 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ने दिया है। आशुतोष तिवारी यह बातें मनीकंट्रोल से हुई अपनी खासबातचीत में कही।
पिछली पॉलिसी मीट में आरबीआई गर्वनर ने इस तरह के संकेत दिए थे कि फिक्सड रेट रिवर्स रेपो लेडिंग 2 से 3 लाख करोड़ रुपये के आसपास बनाए रखी जाएगी। जो इस समय का वर्तमान लेवल है। इसके अलावा इस तरह के संकेत दिए गए थे कि बकाया लिक्विडिटी को वेरिएबल रिवर्स रेपो (VRRR) के जरिए कम किया जाएगा।
मनीकंट्रोल से हुई इस बातचीत में आशुतोष तिवारी ने कहा है कि हमें उम्मीद है कि आरबीआई VRRR को जारी रखेगी और रिवर्स रेपो रेट को 3.75 फीसदी पर लाएगी। कोरोना के नए वैरिएंट को देखते हुए रिवर्स रेपो यह बढ़ोतरी 2 चरणों में की जा सकती है लेकिन हमारी उम्मीद यह है कि आरबीआई एक ही बार में ऐसा कर देगी।
हाल ही में आए जीडीपी आंकड़ों पर बात करते हुए आशुतोष तिवारी ने कहा कि जीडीपी आंकड़े उम्मीद के अनुकूल रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि जीडीपी आंकड़ों को कोरोना के प्रभाव की वजह से सालाना आधार पर तुलनात्मक रुप से नहीं देखना चाहिए। उम्मीद है कि आगे कोविड-19 से जुड़ी चिंता कम होने के साथ जीडीपी में और सुधार देखने को मिलेगा। फिर भी हमें बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। वित्त वर्ष 2022 में जीडीपी ग्रोथ में 9.6-9.8 फीसदी के बीच रह सकती है।
संभावित आरबीआई पॉलिसी पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि सेंट्रल बैंक का रुख अभी भी नरम ही बना रहेगा। रेपो रेट में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसके अलावा क्रेडिट ग्रोथ को सपोर्ट देने के लिए लिक्विविडिटी भी पर्याप्त बनाए रखने पर फोकस होगा।
ऑटो सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 4 व्हीलर गाड़ियों की बिक्री और उत्पादन पर चिप शॉर्टेज का असर देखने को मिला है। वहीं 2 व्हीलर सेगमेंट की बात करें तो ग्रामीण मांग में आई कमी ने 2 व्हीलर सेगमेंट पर अपना असर दिखाया है। कोरोना के दूसरे वेब के भारी असर के चलते रुलर आय में कमी हुई है जिसका डिमांड पर असर पड़ा है।
इसके अलावा मॉनसून की देर में हुई वापसी और नवरात्र के सीजन में हुई बारिश के कारण उत्तर और पूर्वी भारत में फसल की कटाई देरी से हुई है जिसका असर रुलर डिमांड पर देखने को मिला है। उम्मीद है कि अप्रैल महीने से रुलर डिमांड से फिर एक बार से तेजी आएगी। तब तक रबी की फसलें भी कटनी शुरु हो जाएगी। इसी समय शादियों का मौसम भी शुरु हो जाएगा। इस बीच सेमी कंडक्टर की स्थिति में भी धीरे-धीरे सुधार आ रहा है जिसके चलते आगे हमें ऑटो सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद है। इस समय ऑटो सेक्टर खासकर 2-व्हीलर सेगमेंट में पैसे लगाने का अच्छा मौका है।
बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि 2022 के शुरुआत में उत्तर प्रदेश और पंजाब के इलेक्शन बाजार के नजरिए से काफी अहम होगे। इन राज्यों के चुनाव परिणामों का सरकार की नीतियों पर असर देखने को मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि यूनियन बजट के पहले बाजार के फिर से रिकॉर्ड हाई पर लौटने की उम्मीद नहीं है लेकिन आगे हमें बाजार में किसी बड़ी गिरावट की भी उम्मीद नजर नहीं आती है। लेकिन शर्त यह है कि कोरोना के मामले में एकाएक कोई बड़ा उछाल नहीं आना चाहिए।