अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय समय के मुताबिक 2 अप्रैल सुबह 6:30 देश को संबोधित किया। उनके संबोधन के बाद शेयरों की कीमतों में गिरावट दिखी। डॉलर में मजबूती आई। क्रूड ऑयल में उछाल आया। ट्रंप ने संबोधन में जो बातें कहीं, वह बाजार की उम्मीद के उलट थी। बाजार को उम्मीद थी कि वह ईरान के साथ चल रही लड़ाई खत्म करने का ऐलान करेंगे। इसलिए उनके संबोधन पर पूरी दुनिया की नजरें लगी थीं।
ट्रंप के आक्रामक रुख से शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट
ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के प्रति आक्रामक रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि दो-तीन हफ्तों में वह ईरान पर बड़े हमले करेंगे। इस ऐलान से यूएस फ्यूचर्स में गिरावट आई। भारत सहित एशियाई बाजारों में बड़ी गिरावट आई। Nifty और Sensex बड़ी गिरावट के साथ खुले। 11:14 बजे निफ्टी 2 फीसदी यानी 452 प्वाइंट्स गिरकर 22,229 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.98 फीसदी यानी 1452 प्वाइंट्स गिरकर 71,692 पर चल रहा था। जापान के निक्केई में 2.46 फीसदी गिरावट आई। हांगकांग का हैंगसेंग 1.27 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया का कोस्पी तो 5 फीसदी से ज्यादा क्रैश कर गया।
देश और दुनिया में सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट
डॉलर इंडेक्स 0.40 फीसदी चढ़कर 100.05 पर पहुंच गया। ब्रेंट क्रूड तो 6.52 फीसदी के उछाल के साथ 107 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। सोने और चांदी में बड़ी गिरावट दिखी। गोल्ड 4 फीसदी से ज्यादा गिरावट के साथ 4585 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी 6 फीसदी से ज्यादा गिरकर 70 डॉलर प्रति औंस पर थी। इंडिया में भी गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में बड़ी गिरावट आई। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर सिल्वर फ्यूचर्स 6 फीसदी यानी 15,440 रुपये गिरकर 2,27,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था। गोल्ड फ्यूचर्स 2.27 फीसदी यानी 3,402 रुपये की गिरावट के साथ 1,46,702 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था।
ट्रंप का देश के नाम संबोधन बाजार के उम्मीद के उलट
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप का भाषण मार्केट की उम्मीद के उलट था। बाजार को उम्मीद थी कि वह ईरान से लड़ाई खत्म करने का ऐलान करेंगे, जबकि उन्होंने आने वाले दिनों में ईरान पर बड़े हमले करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान से समझौता नहीं हुआ तो वह उसके पावर प्लांट को निशाना बनाएंगे। यह दुनियाभर के शेयर बाजारों के लिए खराब खबर है। ईरान में लड़ाई लंबे समय चलने से ग्लोबल इकोनॉमी पर बड़ा असर पड़ेगा।
मध्यपूर्व में लड़ाई जारी रहने से ग्लोबल इकोनॉमी पर खराब असर
महंगे क्रूड ऑयल से दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा है। इससे अमेरिकी में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट घटाने की उम्मीद कम हो गई है। ईस्टस्प्रिंग इनवेस्टमेंट्स हांगकांग में एशियन इक्विटी पोर्टफोलियो स्पेशियलिस्ट केन वोंग ने कहा कि अभी यह कहना मुश्किल है कि आने वाली तिमाहियों में ग्लोबल इकोनॉमी पर इन घटनाक्रम का कितना असर पड़ेगा। इनवेस्को एसेट मैनेजमेंट जापन में ग्लोबल मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट टोमो किनोशिता ने कहा कि अब यह बिल्कुल साफ हो गया है कि लड़ाई खत्म होने नहीं जा रही है।
महंगे क्रूड ऑयल से बढ़ रहा भारत का इंपोर्ट बिल
अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी। तब से भारतीय शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है। सेंसेक्स और निफ्टी 15 फीसदी से ज्यादा गिर चुके हैं। उधर, क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से फ्यूल की कीमतें बढ़ने का डर है। साथ ही सरकार का इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि महंगे क्रूड का असर जीडीपी ग्रोथ पर भी पड़ेगा। अब तक भारत की जीडीपी की ग्रोथ अच्छी रही है। लेकिन, आगे इस पर असर पड़ सकता है।