31 दिसंबर 2025 तक पहली बार घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs को हिस्सेदारी के मामले में पीछे छोड़ दिया। Nifty 50 में DIIs की हिस्सेदारी करीब 24.8 प्रतिशत रही, जबकि FIIs की हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत रही।

31 दिसंबर 2025 तक पहली बार घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs को हिस्सेदारी के मामले में पीछे छोड़ दिया। Nifty 50 में DIIs की हिस्सेदारी करीब 24.8 प्रतिशत रही, जबकि FIIs की हिस्सेदारी 24.3 प्रतिशत रही।
मौजूदा वित्त वर्ष की शुरुआती तीन तिमाहियों में से दो में FIIs नेट सेलर रहे। वहीं, DIIs लगातार खरीदारी करते रहे। कैलेंडर वर्ष 2025 में DIIs ने करीब ₹7,50,000 करोड़ बाजार में डाले। FIIs का कुल आउटफ्लो ₹1,50,000 करोड़ से ज्यादा रहा।
दिलचस्प बात यह है कि बाजार को लेकर दोनों का नजरिया अलग दिख रहा है। फिर भी दिसंबर वतिमाही में कुछ ऐसे शेयर रहे जहां दोनों ने एक साथ हिस्सेदारी बढ़ाई।
Mphasis Limited
आईटी कंपनी Mphasis में DIIs ने दिसंबर तिमाही (Q3FY26) में 8.2 प्रतिशत अंक और FIIs ने 1.3 प्रतिशत अंक हिस्सेदारी बढ़ाई। कुल बढ़ोतरी 9.5 प्रतिशत अंक रही। तिमाही के अंत तक DIIs की हिस्सेदारी 45.3 प्रतिशत और FIIs की 19.8 प्रतिशत हो गई।
संस्थागत खरीद की एक बड़ी वजह सितंबर तिमाही में लॉन्च किया गया Mphasis NeoIPTM Agentic Platform माना जा रहा है। यह AI आधारित प्लेटफॉर्म बिजनेस और ऑपरेशन एजेंट के जरिए लक्ष्य आधारित ऑर्केस्ट्रेशन की सुविधा देता है।
दिसंबर तिमाही में कंपनी का कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू ₹3,850 करोड़ रहा, जिसमें 69 प्रतिशत डील AI आधारित थीं। वित्तीय प्रदर्शन भी मजबूत रहा। बिक्री 12.4 प्रतिशत बढ़कर ₹4,003 करोड़ पहुंची। नेट प्रॉफिट 9 प्रतिशत बढ़कर ₹442 करोड़ रहा।
Ratnaveer Precision Engineering Limited
स्टील और मेटल प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी में FIIs ने 7 प्रतिशत अंक और DIIs ने 2.5 प्रतिशत अंक हिस्सेदारी बढ़ाई। कुल बढ़ोतरी 9.5 प्रतिशत अंक रही। तिमाही के दौरान कंपनी ने ₹185 करोड़ का QIP जारी किया था।
दिसंबर तिमाही में बिक्री 5.8 प्रतिशत बढ़कर ₹269 करोड़ रही। लेकिन मुनाफा 49 प्रतिशत बढ़कर ₹17 करोड़ हो गया। यह सिर्फ एक तिमाही की तेजी नहीं है। कंपनी की बिक्री और मुनाफा पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहे हैं। मैनेजमेंट FY26 में ₹1,100 करोड़, FY27 में ₹1,500 करोड़ और FY28 में ₹1,800 करोड़ की आय का लक्ष्य रखता है।
Swiggy Limited
फूड और क्विक कॉमर्स डिलीवरी कंपनी Swiggy में FIIs ने 3.8 प्रतिशत अंक और DIIs ने 6.6 प्रतिशत अंक हिस्सेदारी बढ़ाई। कुल बढ़ोतरी 10.4 प्रतिशत अंक रही। तिमाही के अंत तक FIIs की हिस्सेदारी 16.1 प्रतिशत और DIIs की 22.5 प्रतिशत हो गई। तिमाही के दौरान कंपनी ने ₹10,000 करोड़ का बड़ा QIP जारी किया।
मंथली ट्रांजैक्टिंग यूजर 37 प्रतिशत बढ़कर 2.4 करोड़ हो गए। प्लेटफॉर्म की एडजस्टेड रेवेन्यू 51 प्रतिशत बढ़कर ₹6,431 करोड़ रही। फूड डिलीवरी बिजनेस का ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू 20.5 प्रतिशत बढ़कर ₹8,959 करोड़ रहा, जबकि क्विक कॉमर्स का 103 प्रतिशत बढ़कर ₹7,938 करोड़ हो गया। हालांकि कंपनी का घाटा ₹799 करोड़ से बढ़कर ₹1,065 करोड़ हो गया।
RBL Bank Limited
प्राइवेट सेक्टर RBL Bank में FIIs ने 6.4 प्रतिशत अंक और DIIs ने 4.4 प्रतिशत अंक हिस्सेदारी बढ़ाई। कुल बढ़ोतरी 10.8 प्रतिशत अंक रही। तिमाही के अंत तक FIIs की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत और DIIs की 39.7 प्रतिशत हो गई। तिमाही के दौरान Emirates NBD ने प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए ₹27,000 करोड़ से ज्यादा पूंजी निवेश कर 60 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की।
दिसंबर तिमाही में RBL Bank का रेवेन्यू 3.9 प्रतिशत बढ़ा। मुनाफा ₹33 करोड़ से बढ़कर ₹214 करोड़ हो गया, यानी 555 प्रतिशत की उछाल। ग्रॉस NPA 2.9 प्रतिशत से घटकर 1.9 प्रतिशत रहा। हालांकि नेट NPA 0.53 प्रतिशत से बढ़कर 0.55 प्रतिशत हो गया। एडवांस 14 प्रतिशत बढ़कर ₹1,03,086 करोड़ और डिपॉजिट 12 प्रतिशत बढ़कर ₹1,19,729 करोड़ हो गए।
Utkarsh Small Finance Bank Limited
Utkarsh Small Finance Bank में FIIs ने 10.1 प्रतिशत अंक और DIIs ने 7.35 प्रतिशत अंक हिस्सेदारी बढ़ाई। कुल बढ़ोतरी 17.45 प्रतिशत अंक रही, जो इस सूची में सबसे ज्यादा है। तिमाही के अंत तक FIIs की हिस्सेदारी 11.8 प्रतिशत और DIIs की 9.7 प्रतिशत हो गई। बैंक ने ₹950 करोड़ का राइट्स इश्यू भी किया।
हालांकि बैंक का ग्रॉस लोन पोर्टफोलियो 3.9 प्रतिशत घटकर ₹18,306 करोड़ रहा। कुल डिपॉजिट 4.5 प्रतिशत बढ़कर ₹21,087 करोड़ हो गए। रेवेन्यू ₹932 करोड़ से घटकर ₹821 करोड़ रह गया। घाटा ₹168 करोड़ से बढ़कर ₹375 करोड़ हो गया। ग्रॉस NPA 6.17 प्रतिशत से बढ़कर 11.1 प्रतिशत हो गया, जबकि नेट NPA 2.5 प्रतिशत से बढ़कर 4.48 प्रतिशत हो गया।
मैनेजमेंट का कहना है कि JLG लोन से नॉन JLG लोन में शिफ्ट के कारण यह दबाव दिख रहा है। उनका लक्ष्य FY28 तक ROE को फिर से 15 प्रतिशत तक ले जाना है, जो मार्च 2025 तक घटकर 1 प्रतिशत रह गया था।
FIIs और DIIs ने यहां भी खरीदी हिस्सेदारी
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