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नहीं टूट रहा FPI की बिकवाली का सिलसिला, अप्रैल के केवल 2 दिनों में बेच दिए ₹19837 करोड़ के भारतीय शेयर

FPI's Selling in April: NSDL के आंकड़ों के अनुसार, ताजा बिकवाली के बाद FPI साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 1.5 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। आगे FPI का निवेश तभी आएगा, जब युद्ध के मोर्चे पर तनाव कम होगा और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आएगी

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Apr 05, 2026 पर 11:51 AM
नहीं टूट रहा FPI की बिकवाली का सिलसिला, अप्रैल के केवल 2 दिनों में बेच दिए ₹19837 करोड़ के भारतीय शेयर
मार्च में FPI ने घरेलू शेयर बाजार में करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड सेलिंग की थी।

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है। अप्रैल में भी यह जारी है। इस महीने के पहले दो कारोबारी सत्रों में ही FPI ने 19,837 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं। इसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और रुपये में लगातार गिरावट को माना जा रहा है। इससे पहले मार्च में FPI ने घरेलू शेयर बाजार में करीब 1.17 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड सेलिंग की थी। 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे पर शेयर बाजार बंद था।

इससे पहले अक्टूबर, 2024 में FPI ने किसी एक महीने में सबसे अधिक सेलिंग की थी। उस वक्त उन्होंने 94017 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। फरवरी 2026 में FPI ने शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो 17 महीने का हाई रहा। अप्रैल के दो कारोबारी सत्रों में उन्होंने 19,837 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। NSDL के आंकड़ों के अनुसार, ताजा बिकवाली के बाद FPI साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 1.5 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी रहने, कच्चे तेल के दाम के फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने, रुपये में लगातार गिरावट और डॉलर की मजबूती की वजह से FPI की बिकवाली रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसमें आगे और कमजोरी की आशंका से भी बिकवाली को बल मिल रहा है।

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