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नहीं थम रही FPI की सेलिंग, मार्च के पहले 15 दिनों में भारतीय शेयरों से निकाले ₹52704 करोड़

FPI's Selling in March: कहा जा रहा है कि भारत में FPI की सेलिंग शॉर्ट टर्म के लिए ही रहने की संभावना है। विदेशी पोर्टफोलिया निवेशकों की सेलिंग की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन को अभी ज्यादा आकर्षक बाजार के रूप में देखा जा रहा है

Edited By: Ritika Singhअपडेटेड Mar 15, 2026 पर 12:08 PM
नहीं थम रही FPI की सेलिंग, मार्च के पहले 15 दिनों में भारतीय शेयरों से निकाले ₹52704 करोड़
इससे पहले फरवरी में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च के पहले 15 दिनों में घरेलू शेयर बाजार से 52,704 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके पीछे कारण हैं- पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका। इससे पहले फरवरी में FPI ने भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये डाले थे, जो 17 महीने का उच्च स्तर था।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये, दिसंबर 2025 में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर 2025 में 3,765 करोड़ रुपये निकाले थे। मार्च महीने में अब तक (13 मार्च तक) FPI ने भारतीय शेयर बाजारों में लगभग 52,704 करोड़ की सेलिंग की है।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि FPI की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एंजल वन के सीनियर फंडामेंटल एनालिस्ट वकारजावेद खान का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक संघर्ष की आशंकाओं ने ब्रेंट क्रूड को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया। इसके अलावा रुपया 92 प्रति डॉलर के स्तर के आसपास कमजोर बना हुआ है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने के बीच FPI अब बिकवाली कर रहे हैं।

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