Stocks to Sell: एक्सपर्ट ने कहा बेच दो, फटाक से 10% टूटकर लोअर सर्किट पर आ गया यह शेयर

Stocks to Sell: किसी शेयर से अच्छा मुनाफा हासिल करने के लिए यह भी तय करना जरूरी है कि एग्जिट कहां लेना है। एक कंपनी ऐसी है जिसकी जून तिमाही में कारोबारी सेहत गिरी और सालाना आधार पर यह मुनाफे से घाटे में आ गई। वहीं इसकी एसेट क्वालिटी भी गिरी। अब कंपनी का कहना है कि सितंबर तिमाही में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है तो ब्रोकरेज ने फटाफट बेचने की सलाह दी है

अपडेटेड Sep 23, 2024 पर 4:35 PM
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Fusion Finance की रेटिंग इनवेस्टेक ने होल्ड से घटाकर सेल कर दी है और टारगेट प्राइस घटाकर 500 रुपये से 300 रुपये कर दिया है।

Fusion Finance Shares: गरीब और सामाजिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को लोन बांटने वाली फ्यूज माइक्रो फाइनेंस के शेयर आज धड़ाम से गिर गए। ब्रोकरेज फर्म इनवेस्टेक ने इसे सेल रेटिंग दी है जिसके चलते शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव बना। इसके चलते शेयर में हल्की-फुल्की नहीं बल्कि तेज बिकवाली दिखी और यह 10 फीसदी टूटकर 274.70 रुपये (Fusion Finance Share Price) के लोअर सर्किट पर आ गया और इसी पर यह बंद भी हुआ। यह इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। 31 जनवरी 2024 को यह एक साल के हाई 674 रुपये पर था यानी कि 8 महीने में यह 59 फीसदी से अधिक टूटकर आज एक साल के निचले स्तर पर आ गया।

Fusion Finance को क्यों दी ब्रोकरेज ने बेचने की सलाह?

फ्यूजन फाइनेंस की रेटिंग इनवेस्टेक ने होल्ड से घटाकर सेल कर दी है और टारगेट प्राइस घटाकर 500 रुपये से 300 रुपये कर दिया है। रेटिंग में यह कटौती ऐसे समय में हुई है, जब फ्यूजन फाइनेंस ने जून तिमाही की तुलना में सितंबर तिमाही में अधिक क्रेडिट लॉस प्रोविजनिंग का अनुमान जाहिर किया। ब्रोकरेज का मानना है कि इससे क्रेडिट डाउनग्रेड, फंडिंग की दिक्कतों या लोन बुक में गिरावट झेलना पड़ सकता है। एक और ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने भी इसकी रेटिंग को घटाकर न्यूट्रल कर दी है और टारगेट प्राइस 440 रुपये है।


कैसी है फ्यूजन फाइनेंस की कारोबारी सेहत?

एक्सजेंज फाइलिंग में कंपनी ने खुलासा किया कि सितंबर तिमाही में इसका क्रेडिट लॉस प्रोविजनिंग 550 करोड़ रुपये का रह सकता है जबकि जून तिमाही में यह 348 करोड़ रुपये पर था। इस पर अब वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में जुलाई-सितंबर 2024 के नतीजे के बाद ही रिवीजन होगा। जून तिमाही की बात करें तो इसे 36 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था जबकि पिछले साल की समान तिमाही में इसे 120 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ था।

कंपनी ने इसकी वजह माइक्रोफाइनेंस लोन को बताया जिसकी लोनबुक में करीब 24 फीसदी हिस्सेदारी है। कस्टमर ओवर-लेवरजिंग, सेंटर मीटिंग पर कम उपस्थिति, ग्राहकों को माइग्रेशन और फील्ड स्टॉफ की छंटनी के चलते इसकी कारोबारी सेहत गिरी। जून तिमाही में इसका एसेट क्वालिटी भी बिगड़ गया और ग्रॉस एनपीए तिमाही आधार पर 2.89 फीसदी से उछलकर 5.46 फीसदी पर पहुंच गया और नेट एनपीए भी इस दौरान 0.6 फीसदी से उछलकर 1.25 फीसदी पर पहुंच गया।

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