Zerodha पीछे छूटा, देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म बनी Groww, NSE के आंकड़ों से हुआ खुलासा

Groww or Zerodha: डीमैट खाता खुलवाने के लिए निवेशक जीरोधा की बजाय ग्रो को वरीयता दे रहे हैं। NSE के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं। सितंबर 2023 तक के आंकड़ों के हिसाब से अब जीरोधा से अधिक ग्रो के एक्टिव कस्टमर्स हैं। हालांकि एक मामले में ग्रो जीरोधा से मीलों पीछे हैं। जानिए किस मामले में ग्रो पीछे है और जीरोधा क्यों बहुत आगे हैं?

अपडेटेड Oct 12, 2023 पर 1:59 PM
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Groww Vs Zerodha: एक्टिव इनवेस्टर्स के हिसाब से दिग्गज फिनटेक स्टार्टअप ग्रो (Groww) अब देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज बन गई है। एक्टिव इनवेस्टर्स के मामले में इसने जीरोधा (Zerodha) को भी पीछे छोड़ दिया है। घरेलू एक्सचेंज NSE के मुताबिक बेंगलुरू की ग्रो के अब 66.3 लाख एक्टिव इनवेस्टर्स हैं जबकि जीरोधा के 64.8 लाख एक्टिव इनवेस्टर्स। ये आंकड़े सितंबर 2023 तक के हैं। करीब ढाई साल पहले मार्च 2021 में जीरोधा के 34 लाख ग्राहक थे जबकि ग्रो के 7.8 लाख ग्राहक। उसके बाद से जीरोधा के यूजर सिर्फ दोगुना ही हो पाए हैं जबकि ग्रो के ग्राहक करीब 750 फीसदी बढ़ गए। वित्त वर्ष 2023 में जीरोधा के 63.9 लाख और ग्रो के 53.7 ग्राहक थे।

लेकिन रेवेन्यू के मामले में Groww से मीलों आगे है Zerodha

एक्टिव इनवेस्टर्स के मामले में जीरोधा को ग्रो ने पछाड़ दिया है लेकिन रेवेन्यू के मामले में पीछे रह गई है। जीरोधा का रेवेन्यू ग्रो की तुलना में पांच गुना से अधिक है। वित्त वर्ष 2023 में जीरोधा का रेवेन्यू सालाना आधार पर 39 फीसदी उछलकर 6875 रुपये पर पहुंच गया। वहीं प्रॉफिट भी बढ़कर 2907 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं ग्रो को चलाने वाली नेक्स्टबिलियन टेक्नोलॉजी (Nextbillion Technology) का रेवेन्यू इस दौरान 367 करोड़ रुपये से बढ़कर 1294 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं इसे वित्त वर्ष 2023 में 73 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हासिल हुआ।

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F&O के दम पर ही जीरोधा रेवेन्यू में है आगे

ग्रो और जीरोधा के बीच रेवेन्यू के मामले में काफी अंतर है। इसकी वजह ये है कि F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स) ट्रेडिंग में इसका दबदबा है और इसी में ब्रोकरेज फर्म को सबसे अधिक मुनाफा होता है। वहीं ग्रो की बात करें तो इसने लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट प्रॉडक्ट्स और म्यूचुअल फंड्स के जरिए नए ग्राहकों को जोड़ने पर फोकस किया हुआ है। हालांकि कंपनी डेली और F&O ट्रेडर्स को भी आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

डीमैट खाते और एक्टिव कस्टमर्स में इतना फर्क

सितंबर के अंत तक देश में करीब 12.97 करोड़ डीमैट खाते थे। NSE के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 3.34 करोड़ भारतीय ही साल में कम से कम एक बार एक्सचेंज पर सक्रिय रूप से ट्रेडिंग करते हैं। हाल ही में जीरोधा के सीईओ नितिन कामत ने कहा था कि अकाउंट खोलने का चार्ज लेना सही है क्योंकि इससे वही ग्राहक जुड़ते हैं जो वाकई ट्रेडिंग करना ताहते हैं। ग्रो की बात करें तो ये अकाउंट खोलने के लिए कोई चार्ज नहीं लेती हैं जिसके चलते इसने क्लाइंट्स के मामले में जीरोधा को पछाड़ दिया।

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