HDFC बैंक पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने साफ कहा है कि उनके इस्तीफे की वजह से बैंक के शेयरों की वैल्यू में गिरावट गिरावट नहीं आई। उन्होंने अपने इस्तीफे में नैतिकता और मूल्यों से जुड़ी चिंताओं का जिक्र किया था।

HDFC बैंक पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने साफ कहा है कि उनके इस्तीफे की वजह से बैंक के शेयरों की वैल्यू में गिरावट गिरावट नहीं आई। उन्होंने अपने इस्तीफे में नैतिकता और मूल्यों से जुड़ी चिंताओं का जिक्र किया था।
30 मार्च को CNBC-TV18 से बातचीत में चक्रवर्ती ने कहा, 'मैं इस बात को पूरी तरह खारिज करता हूं कि मेरे इस्तीफे से वैल्यू में गिरावट आई। मैंने वही लिखा जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। अगर कोई इसे इशारा या आरोप कह रहा है, तो उसे शब्दों का मतलब समझना चाहिए।'
SEBI चेयरमैन के बयान के बाद प्रतिक्रिया
चक्रवर्ती का यह बयान SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की टिप्पणी के बाद आया है। पांडे ने कहा था कि स्वतंत्र निदेशकों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और बिना सबूत के किसी तरह के इशारे या आरोप नहीं लगाने चाहिए।
चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद HDFC बैंक के शेयर में तीन कारोबारी सत्रों में करीब 12% की गिरावट आई। इससे बैंक की मार्केट वैल्यू में करीब 1.52 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
CEO के साथ विवाद की खबरों पर सफाई
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि चक्रवर्ती और बैंक के CEO शशिधर जगदीशन के बीच पावर स्ट्रगल था।
हालांकि, चक्रवर्ती ने इसे खारिज करते हुए कहा कि CEO की दोबारा नियुक्ति का मामला बोर्ड में आया ही नहीं था। ऐसे में मतभेद की बात ही नहीं उठती।
दो साल से बन रही थी दूरी
चक्रवर्ती ने बताया कि उनका इस्तीफा किसी एक घटना की वजह से नहीं था। पिछले करीब दो साल से उन्हें नैतिकता और कामकाज के तरीके में तालमेल की कमी महसूस हो रही थी।
उन्होंने कहा कि जोखिम भरे फैसलों से बचना जरूरी है और बैंक में कुछ अंडरपरफॉर्मेंस के संकेत भी थे, जैसे कम CASA और कम इनकम रेशियो।
‘पर्सनैलिटी इश्यू’ पर भी की बात
चक्रवर्ती ने कहा कि पर्सनैलिटी क्लैश की बात को जरूरत से ज्यादा बढ़ाया गया। उनके मुताबिक, इस्तीफा पूरी तरह नैतिकता और मूल्यों में असमानता की वजह से दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि HDFC के साथ हुए बड़े मर्जर का पूरा फायदा अभी तक सामने नहीं आया है।
जांच के लिए लॉ फर्म नियुक्त
HDFC बैंक ने कहा है कि उसने चक्रवर्ती के इस्तीफे के पत्र की समीक्षा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय लॉ फर्म्स को नियुक्त किया है। इसका मकसद बैंक के गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स को और मजबूत करना है।
बैंक का कहना है कि इस्तीफे के पत्र में किसी खास घटना या ऐसी प्रैक्टिस का जिक्र नहीं है, जो व्यक्तिगत मूल्यों के खिलाफ हो।
इस पर चक्रवर्ती ने कहा कि लॉ फर्म्स की नियुक्ति एक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन उनके पत्र में बड़े स्तर के गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों की ओर इशारा किया गया है।
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