HDFC Bank Shares: Q4 रिजल्ट के बाद शेयर धड़ाम, छह ब्रोकरेज फर्मों से समझें आगे की स्ट्रैटेजी

HDFC Bank Shares: पिछले वित्त वर्ष 2026 की आखिरी तिमाही जनवरी-मार्च 2026 के कारोबारी नतीजे पेश करने के बाद आज जब स्टॉक मार्केट खुला तो एचडीएफसी बैंक के शेयर धड़ाम हो गए। जानिए कि रिजल्ट में ऐसा क्या रहा, जो शेयरों पर दबाव बना और ब्रोकरेज फर्मों का रुझान क्या है

अपडेटेड Apr 20, 2026 पर 3:58 PM
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HDFC Bank का मार्च तिमाही में सालाना आधार पर ब्याज से नेट इनकम यानी NII करीब 3% बढ़ गया जोकि अनुमान से कम रहा और पियर्स के मुकाबले तो नेट इंटेरेस्ट मार्जिन में भी दबाव बना रहा।

HDFC Bank Shares: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज शुरुआती कारोबारी में बिकवाली का दबाव दिखा। मार्च 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे के बाद आज मार्केट खुला तो निवेशकों ने फटाफट मुनाफा निकालना शुरू किया जिससे शेयर दबाव में आए और यह शुरुआती कारोबार में ही 1% से अधिक फिसल गया। वहीं ब्रोकरेजेज के रुझान की बात करें तो इसे कवर करने वाले  47 एनालिस्ट्स में से किसी ने भी किसी ने भी इसे बेचने की सलाह नहीं दी है। आज बीएसई पर यह 0.56% की गिरावट के साथ ₹795.40 (HDFC Bank Share Price) पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में यह 1.24% टूटकर ₹790.00 तक आ गया था।

HDFC Bank के रिजल्ट की किन बातों से शेयरों पर दबाव?

एचडीएफसी बैंक का मार्च तिमाही में सालाना आधार पर ब्याज से नेट इनकम यानी NII करीब 3% बढ़ गया जोकि अनुमान से कम रहा और पियर्स के मुकाबले तो नेट इंटेरेस्ट मार्जिन में भी दबाव बना रहा। इस दौरान बैंक का शुद्ध मुनाफा ऑपरेटिंग कॉस्ट और प्रोविजंस की नरमी के चलते 9% उछल पड़ा। बैंक का एडवांसेज करीब 12% की रफ्तार से बढ़ा जो इंडस्ट्री के रुझानों से थोड़ी धीमी रही तो डिपॉजिट्स में 14% की तेजी आई जिससे फंडिंग को लेकर राहत मिली। बैंक की एसेट क्वालिटी मजबूत हुई है और ग्रास एनपीए 1.15% और नेट एनपीए 0.38% पर रहा तो कैपिटल एडेकेसी 19.7% के मजबूत स्तर पर बना रहा।


हालांकि कुछ अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं। नेतृत्व में बदलाव पर नजरें अभी भी मुख्य रूप से बनी हुई है जिसमें सीएमडी के कार्यकाल के अपकमिंग रिन्यूअल और चेयरमैन का पेंडिंग एप्वाइंटमेंट शामिल है। इसके अलावा लीगल रिव्यू और दुबई से जुड़ा मुद्दा भी अभी सुलझ नहीं पाया लेकिन बैंक के मैनेजमेंट ने नियामकीय बातों का समर्थन किया है।

क्या कहना है ब्रोकरेजज फर्मों का?

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का एचडीएफसी बैंक पर रुझान ₹1025 के टारगेट प्राइस के साथ ओवरवेट है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि प्रोविजंस और ऑपरेटिंग कॉस्ट में तेज गिरावट के चलते बैंक का शुद्ध मुनाफा इसके अनुमान के मुकाबले 4% बेहतर रहा जिसने कोर इनकम की सुस्ती को काफी हद तक एडजस्ट किया। ब्रोकरेज फर्म का यह भी कहना है कि अब मुख्य फोकस लोन ग्रोथ पर बना हुआ है, और लोन-टू-डिपॉजिट रेश्यो अब कोई दिक्कत नहीं है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच बैंक को एक पसंदीदा विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने ₹1200 के टारगेट प्राइस के साथ एचडीएफसी बैंक को आउटपरफॉर्म रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म ने एचडीएफसी बैंक के मार्च तिमाही के रिजल्ट के चुनौतीपूर्ण माहौल में भी स्थिर बताया है। हालांकि इसने अपनी रिपोर्ट में लोन-टू-डिपॉजिट रेश्यो में गिरावट का जिक्र किया, जो तिमाही आधार पर 99% से घटकर 95% रह गया।

ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने ₹950 के टारगेट प्राइस के साथ इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। लिक्विडिटी को लेकर सख्त माहौल में डिपॉजिट ग्रोथ को ब्रोकरेज ने काफी अहम बताया और कहा कि लीडरशिप पर नजर रहेगी। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 में इसका RoA (रिटर्न ऑन एसेट्स) 1.8% और RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) 14% रहेगा।

एक और ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने ₹1,150 के टारगेट प्राइस के साथ एचडीएफसी बैंक को आउटपरफॉर्म रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि मार्च तिमाही में भले ही कोई बड़ा सुधार नहीं दिखा, लेकिन बैंक ने बैलेंस शीट में चल रहे एडजस्टमेंट्स न के बीच स्थिर प्रदर्शन रहा। तिमाही आधार पर बैंक का मार्जिन मजबूत हुआ और प्रॉफिटेबिलिटी स्थिर रही तो RoA सालाना आधार पर 1.9% मजबूत हुआ और EPS में सालाना आधार पर 9% की तेजी आई।

यूबीएस ने ₹1175 के टारगेट प्राइस के साथ इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। ब्रोकरेड फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 के बीच इसका RoE (रिटर्न ऑन इक्विटी) 14-15% रह सकता है।

जेपीमॉर्गन ने ₹990 के टारगेट प्राइस के साथ एचडीएफसी बैंक को ओवरवेट रेटिंग दी है। जेपीमॉर्गन को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2027-28 के बीच इसका एनआईआई क्रेडिट ग्रोथ में सुधार और फंडिंग कॉस्ट की नरमी से आगे बढ़ेगा। हालांकि लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो के 114% तक गिरने से नियर टर्म में बैलेंस शीट की फ्लेक्सिबिलिटी सीमित हो सकती है।

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