Hindustan Zinc Shares: चांदी की कीमतों में शुक्रवार 30 जनवरी को आई भारी गिरावट का सीधा असर हिंदुस्तान जिंक के शेयरों पर देखने को मिला। वेदांता ग्रुप की इस कंपनी के शेयर कारोबार के दौरान करीब 12 प्रतिशत तक लुढ़क गए। चांदी की कीमतों में आई गिरावट के पीछे निवेशकों ने हिंदुस्तान जिंक के शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे शेयर पर दबाव बढ़ गया।
दोपहर के कारोबार में हिंदुस्तान जिंक का शेयर 631.55 रुपये तक फिसल गया। चूंकि यह चांदी का उत्पादन करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में चांदी की कीमतों में आई तेज गिरावट ने इस शेयर को लेकर निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया।
चांदी की कीमतों में तेज गिरावट
भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च एक्सपायरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स का भाव 9 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर ₹3,63,723 प्रति किलो पर आ गया। इससे पहले गुरुवार को इसका भाव ₹4,39,337 प्रति किलो के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। यानी महज एक दिन में चांदी अपने शिखर से करीब 12 प्रतिशत से ज्यादा टूट चुकी है। मई और जुलाई एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में भी करीब 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे क्या हैं वजह?
चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट के पीछे अमेरिका की मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता अहम वजह मानी जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में यह संकेत दिया कि वे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के उत्तराधिकारी की घोषणा जल्द कर सकते हैं। शेयर बाजारों में अटकलें हैं कि फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन का रुख तुलनात्मक रुप से ज्यादा ‘हॉकिश’ हो सकता है।
रॉयटर्स के मुताबिक, KCM के चीफ ट्रेड एनालिस्ट टिम वॉटरर ने कहा कि फेडरल रिजर्व के चेयरमैन पद के लिए कम नरम रुख वाले उम्मीदवार की संभावना, डॉलर में फिर से मजबूती ने कीमती धातुओं पर दवाब बनाया है। वहीं StoneX के सीनियर एनालिस्ट मैट सिम्पसन ने कहा कि जेरोम पॉवेल की जगह केविन वार्श को फेडरल रिजर्व का नया अध्यक्ष बनाए जाने की अफवाहों के कारण एशियाई कारोबार के दौरान सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ा है।
सिल्वर ETFs में भी भारी बिकवाली
चांदी की कीमतों में गिरावट का असर सिल्वर ETF के भाव पर भी साफ दिखा। एक्सिस सिल्वर ETF करीब 12 प्रतिशत तक गिरा, जबकि मोतीलाल ओसवाल सिल्वर ETF में 11 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। इसके अलावा मिराए एसेट, कोटक, बंधन, HDFC, जीरोधा, ICICI प्रूडेंशियल और निपॉन इंडिया सिल्वर ETF भी 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए।
हिंदुस्तान जिंक 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली रिफाइंड सिल्वर का उत्पादन करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी है। ऐसे में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनी की वैल्यूएशन पर पड़ता है। हालांकि, लंबी अवधि के नजरिये से देखें तो स्टॉक ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। पिछले छह महीनों में इसके शेयरों में करीब 48 प्रतिशत और पिछले पांच सालों में लगभग 133 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली है।
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