रिकवरी पर संशय बरकरार रहने के बावजूद ऑटो पर म्युचुअल फंडों का जोश हाई, जानिए क्या है वजह

स्पार्क कैपिटल ने अपने एक नोट में कहा है कि रूरल इकोनॉमी से इस समय काफी अच्छे संकेत मिल रहे हैं। खरीफ की फसल बंपर रहने की संभावना है। लेकिन अगर रवी की फसल में कमजोरी देखने को मिलती है तो ऑटो सेक्टर की डिमांड पर असर पड़ सकता है

अपडेटेड Jun 17, 2022 पर 12:53 PM
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एनालिस्ट का मानना है कि ऑटो सेक्टर का बुरा दौर बीत चुका है। ग्रामीण मांग में सुधार और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के दूर होने के साथ ही अब इस सेक्टर में तेजी आएगी

घरेलू म्युचुअल फंड इस समय ऑटो मोबाइल सेक्टर पर बुलिश नजर आ रहे हैं। उनको उम्मीद है कि तीन साल की मंदी के बाद अब इस सेक्टर में तेजी नजर आएगी। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशिल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में ऑटो मोबाइल स्टॉक्स में इक्विटी म्युचुअल फंडों की होल्डिंग 7.1 फीसदी के 39 महीने के हाई पर पहुंच गई। इसके अलावा मई का महीना लगातार दूसरा ऐसा महीना रहा है, जिसमें म्युचुअल फंडों ने ऑटो शेयरों की खरीदारी की है। बता दें कि इसके पहले लगातार तीन महीने एमएफ से इस सेक्टर में अपनी पोजीशन घटाई थी।

ऑटो सेक्टर को लेकर सेंटीमेंट में यह बदलाव 3 साल की मंदी के बाद आया है। कोविड महामारी के पहले की मंदी और कोविड के दौर की परेशानियों ने 2021 में ऑटो सेक्टर के लिए तमाम परेशानियां खड़ी की। जिसके चलते निवेशकों ने ऑटो सेक्टर से अपना मुंह मोड़ लिया था। लेकिन हाल में ऑटो मोबाइल सेक्टर के आउटलुक को लेकर सेंटीमेंट सुधरा है। एनालिस्ट का मानना है कि ऑटो सेक्टर का बुरा दौर बीत चुका है। ग्रामीण मांग में सुधार और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के दूर होने के साथ ही अब इस सेक्टर में तेजी आएगी।

एक्सिस सिक्योरिटीज ने हाल ही में जारी एक नोट में कहा है कि वह ऑटो मोबाइल सेक्टर को लेकर बुलिश है। उम्मीद है कि आगे इस सेक्टर में मांग में बढ़ोतरी नजर आएगी। पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में नए लॉन्च से इस सेक्टर को फायदा मिलेगा। इसके अलावा इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में आ रही तेजी के चलते 2022-23 में कमर्शियल वाहनों की बिक्री में भी बढ़ोतरी आएगी।


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स्पार्क कैपिटल ने अपने एक नोट में कहा है कि रूरल इकोनॉमी से इस समय काफी अच्छे संकेत मिल रहे हैं। खरीफ की फसल बंपर रहने की संभावना है। लेकिन अगर रवी की फसल में कमजोरी देखने को मिलती है तो ऑटो सेक्टर की डिमांड पर असर पड़ सकता है। वहीं एडलवाइस सिक्योरिटीज का मानना है कि महंगाई के ऊंचे दर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी, महामारी के बाद की रिकवरी में असमानता कुछ ऐसे कारण हैं जो ऑटो सेक्टर के वॉल्यूम में होने वाले किसी बढ़ोतरी पर निगेटिव असर डाल सकते हैं। इसके अलावा घरेलू ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए सेमीकंडक्टर की शॉर्टेज एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। जानकारों का मानना है कि यह चुनौती 2024 तक अपना असर दिखा सकती है।

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