CLSA के इनवेस्टमेंट एनालिस्ट विकास जैन का मानना है कि भारतीय आईटी सेक्टर भरी अनावश्यक हवा अब निकल चुकी है और यह अपने सही वैल्यूएशन के आसपास नजर आ रहा है। ऐसे में जून तिमाही के अच्छे नतीजों के बाद अब आईटी शेयरों में आगे अच्छी तेजी आने की संभावना है। CNBC-TV18 के साथ हुई अपनी बातचीत में विकास कुमार जैन ने आईटी सेक्टर में एफआईआई की ओनरशिप, इस सेक्टर की स्थिति और इसकी आगे की संभावनाओं पर लंबी बातचीत में की।
इस बातचीत में उन्होंने बाजार पर बात करते हुए कहा कि पिछले 8-9 महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट एफआईआई की 33 अरब डॉलर की बिकवाली पचा चुका है। इस समय भारतीय इक्विटी मार्केट में एफआईआई की प्रतिशत हिस्सेदारी पिछले 10 सालों के निचले स्तरों पर है जबकि घरेलू म्यूचुअल फंडों की ओनरशिप अपने रिकॉर्ड हाई पर है। हालांकि पिछली तिमाही में बाजार में रिटेल हिस्सेदारी कुछ घटी है।
उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि 30 जून 2022 क खत्म हुई तिमाही में ऑटो सेक्टर स्टार परफॉर्मर रहा है। वर्तमान में एफआईआई और घरेलू म्यूचुअल फंड दोनों के पोर्टफोलियो में ऑटो सेक्टर की हिस्सेदारी पिछले 5-7 साल की अवधि में सबसे ज्यादा नजर आ रही है। ऑटो सेक्टर ओवर ओनरशिप जोन में जाता नजर आ रहा है।
आईटी स्टॉक में क्या हो रणनीति ? इस सवाल का जवाब देते हुए विकास जैन ने कहा कि साल की शुरुआत में हम आईटी सेक्टर की तुलना में बैंकिंग सेक्टर पर ज्यादा बुलिश थे। अगर हम दर बढ़ोतरी चक्र पर नजर डालें तो बैंकों ने आईटी की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस समय तमाम मार्केट एनालिस्ट का मानना है कि अब हम ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा देख चुके हैं।
इसी तरह जानकारों का यह भी मानना है कि आईटी स्टॉक्स में अब तक काफी गिरावट आ चुकी है। हम अभी भी आईटी पर अंडरवेट हैं लेकिन आईटी सेक्टर का अनावश्यक फुलाव काफी हद तक खत्म हो चुका है। हाल में आए भारी करेक्शन के बाद इसमें आगे हमें तेजी की संभावना नजर आ रही है।
एफआईआई की तरफ से हो रही बिकवाली पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि रिडेम्पशन रुकते ही एफआईआई की सेलिंग रुक जाएगी। मेरा मानना है कि फंड मैनेजरों ने चीन में होने वाले रिडेम्पशन के भुगतान के लिए भारतीय शेयरों में मुनाफावसूली की है। अपनी इस बात की पुष्टि के लिए जब हम EM फंडों पर नजर डालते हैं तो हमें यह देखने को मिलता है कि करीब 60-65 फीसदी EM फंड इस समय भारत में अंडरवेट है। यह EM फंडों का भारत में अंडरवेट होने का अब तक का सबसे बड़ा अनुपात है।
वैल्यूएशन के अंतर को देखते हुए एफआईआई जल्दी में अपनी पोजिशन को underweight से overweight में नहीं बदल सकते हैं। बाजार की आगे की संभावना पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हाल की रैली के बाद अब हमें इस बात पर ध्यान देने की जरुरत है कि बाजार में तेजी की कितनी संभावना बची है। उन्होंने ये भी कहा कि यहां से बाजार में और तेजी आने के लिए अब बॉन्ड यील्ड में गिरावट की जरूरत है ।
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