स्टॉक स्प्लिट के बाद Tata Steel में 5% की रैली, क्या खरीदारी के लिए बना मौका?

टाटा स्टील के शेयर 29 जुलाई की रिकॉर्ड डेट से एक दिन पहले गुरुवार को एक्स-स्प्लिट हो गए। कंपनी ने अपने इक्विटी शेयरों को 10:1 के रेश्यो में विभाजित करने का ऐलान किया था

अपडेटेड Jul 28, 2022 पर 12:30 PM
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टाटा स्टील के शेयर दोपहर 12 बजे एनएसई पर लगभग 5 फीसदी मजबूत होकर 100.85 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं

Tata Steel shares  : टाटा स्टील के शेयर 29 जुलाई की रिकॉर्ड डेट से एक दिन पहले गुरुवार को एक्स-स्प्लिट हो गए। यानी इसके शेयर में विभाजन के बाद ट्रेडिंग शुरू हो गई है। इसके साथ ही टाटा स्टील के शेयर दोपहर 12 बजे एनएसई पर लगभग 5 फीसदी मजबूत होकर 100.85 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं।

कंपनी ने अपने इक्विटी शेयरों को 10:1 के रेश्यो में विभाजित करने का ऐलान किया था। टाटा स्टील ने स्टॉक स्प्लिट के लिए 29 जुलाई की रिकॉर्ड डेट तय की थी।  इस प्रकार 10 रुपये फेस वैल्यू वाले एक शेयर के बदले में शेयरहोल्डर्स को 1 रुपये फेस वैल्यू 10 शेयर दिए जाएंगे।

एक के बदले 10 में स्प्लिट हुए शेयर


टाटा स्टील के स्टॉक का 10:1 के रेश्यो में विभाजन का मतलब है कि शेयरहोल्डर्स को एक शेयर के बदले में 10 शेयर मिलेंगे और इसी क्रम में गुरुवार को शेयरों की कीमत घट गई है। इसका मतलब है कि शेयरहोल्डर्स के पास अब ज्यादा शेयर होंगे।

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टाटा स्टील के मामले में, शेयर विभाजन से कंपनी के शेयरों की लिक्विडिटी बढ़ जाएगी। इस प्रकार, कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर एक हद तक प्रॉफिटेबिलिटी पर कम हो जाएगा। यह देखा गया है कि जब किसी कंपनी के शेयरों की कीमत बढ़ जाती है तो शेयर विभाजन किया जाता है जिससे छोटे इनवेस्टर्स के लिए शेयर अफोर्डेबल हो जाता है।

जून तिमाह में 13 फीसदी घटा नेट प्रॉफिट

जून, 2022 में समाप्त तिमाही के दौरान टाटा स्टील का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स 12.8 फीसदी घटकर 7,765 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले समान तिमाही में यह 8,907 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी के प्रदर्शन पर पीईटी कोक की कीमतों में उछाल का असर दिखा, जिससे उसकी कॉस्ट बढ़ गई।

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क्या शेयर में करना चाहिए निवेश?

स्वास्तिका इनवेस्टमार्ट के इक्विटी रिसर्च एनालिस्ट पुनीत पटनी ने कहा, “शॉर्ट से मीडियम टर्म के लिए हमारा शेयर पर न्यूट्रल व्यू है। हालांकि, लॉन्ग टर्म में मध्यम से हाई रिस्क लेने में सक्षम इनवेस्टर्स गिरावट में खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं।”

सेंट्रल के एनालिस्ट्स ने कहा, कोविंग कोल की कॉस्ट में कमी और ऊंचे वॉल्यूम को देखते हुए स्टील की कीमतों में गिरावट के चलते वित्त वर्ष 23 की दूसरी तिमाही में प्रॉफिटेबिलिटी में कमी आने का अनुमान है। हालांकि कोकिंग कोल की कीमतों का पूरा असर वित्त वर्ष 23 की तीसरी तिमाही में दिखाई देगा और मार्जिन में सुधार होगा। ब्रोकरेज ने खरीद की सलाह के साथ शेयर के लिए 1,368 रुपये का टारगेट दिया है।

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