आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। ये समिति फंसे हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के तरीके सुझाने के लिए बनाई गई है। बता दें कि अमिताभ कांत इस साल G20 में भारत की अध्यक्षता को भी नेतृत्व दे रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि इस पैनल को फंसे हुए प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और तैयार घरों को उनको खरीदारों को सौंपने के तरीके सुझाने का काम सौंपा गया है।
आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय सलाहकार परिषद ने इस समिति को बनाने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के एक साल बाद मंत्रालय इस समिति के गठन की अधिसूचना जारी की है। 12 अप्रैल 2022 को हुई मीटिंग में यह निर्णय लिया गया था कि एक ऐसी कमेटी गठित की जाएगी जो निर्माणाधीन अवस्था में फंसी तमाम प्रोजेक्ट्स से जुड़ी समस्याओं की जांच करेगी और यह सुझाव देगी कि इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करके कैसे घर खरीदारों को उनके घर सौंपे जा सकते हैं।
समिति अपनी पहली बैठक के 6 महीने के अंदर देगी रिपोर्ट
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया है कि यह समिति अपनी पहली बैठक के 6 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। इस 14 सदस्यी समिति में राज्य और केंद्र सरकारों के तमाम बड़े अधिकारी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के चेरयपर्सन राजीव कुमार ने मनीकंट्रोल से बातचीत करते हुए कहा कि हम पहले ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तमाम फंसे प्रोजेक्ट्स से जुड़ी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए एक कंसल्टेंट की नियुक्ति कर चुके हैं। आगे हम इसके सुझाव पर कार्रवाई करेंगे।
दिल्ली-मुंबई में सबसे ज्यादा रुके प्रोजेक्ट्स
बतातें चलें कि रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनालिस्ट अनारॉक (Anarock) की एक एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 7 माइक्रो मार्केट्स में करीब 500000 घर फंसे पड़े हुए हैं। जिनकी कीमत 4.48 लाख करोड़ रुपये हैं। बतातें चलें कि अनारॉक के इस रिपोर्ट में मेट्रो शहरों के मार्केट शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली एनसीआर इलाके में 1.81 लाख करोड़ रुपये के 240610 घर फंसे हुए हैं। वहीं मुंबई-एमएमआर में 1.84 लाख करोड़ रुपये के 128870 घर फंसे हुए है।