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पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ई-कॉमर्स के खिलाफ नहीं है, लेकिन निष्पक्ष कारोबार चाहता है

यह नई टिप्पणी उनके 21 अगस्त के भाषण के टोन में आई नरमी का संकेत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में ई-कॉमर्स की तेजी से ग्रोथ गर्व की बात नहीं बल्कि चिंता का विषय है, क्योंकि इसका देश में कारोबार करने वाले स्टोरों पर निगेटिव प्रभाव पड़ रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 22, 2024 पर 7:17 PM
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ई-कॉमर्स के खिलाफ नहीं है, लेकिन निष्पक्ष कारोबार चाहता है
श्री गोयल ने आगे कहा, "हम इस बात पर बहुत स्पष्ट हैं कि हम एफडीआई को आमंत्रित करना चाहते हैं, हम प्रौद्योगिकी को आमंत्रित करना चाहते हैं, हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ चीजों को आमंत्रित करना चाहते हैं। और हम ऑनलाइन के बिल्कुल भी खिलाफ नहीं हैं।"

अमेज़न और अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों पर गैर-प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण प्रथाओं में लिप्त होने का आरोप लगाने के एक दिन बाद, भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अपने तीखे तेवर ढ़ीले करते हुए स्पष्ट किया है कि सरकार ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के खिलाफ़ नहीं है, बल्कि निष्पक्ष व्यवहार चाहती है। गोयल ने कहा, "देश केवल यही चाहता है कि ग्राहक और वस्तुओं और सेवाओं के आपूर्तिकर्ता के साथ निष्पक्ष व्यवहार और ईमानदारी हो। हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे लोगों को भी ऐसे ऑनलाइन कारोबारियों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा करने का उचित अवसर मिले।" उन्होंने कहा कि भारत "बिल्कुल भी ऑनलाइन के खिलाफ़ नहीं है।"

उनकी ये नई टिप्पणी उनके 21 अगस्त के भाषण का नरम संस्करण है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में ई-कॉमर्स की तेजी से हो रही ग्रोथ गर्व की बात नहीं बल्कि चिंता का विषय है। क्योंकि इसका देश में कारोबार करने वाले छोटे-दूकानदारों में निगेटिव असर पड़ा है। 21 अगस्त को दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में गोयल ने कहा कि भारत में अमेज़न द्वारा किया गया भारी निवेश जश्न मनाने चीज नहीं है, क्योंकि यह पैसा केवल कंपनी के घाटे को पूरा करता है। उन्होंने आगे टिप्पणी की थी कि अमेज़न को भारी घाटा इसलिए हुआ क्योंकि वह प्रिडेटरी प्राइसिंग (दूसरों को मुकाबले से बाहर करने के लिए कम कीमतों पर बिक्री की रणनीति अपनाना) का पालन करता है।

एक दिन पहले मुंबई के अपने कड़े संबोधन के बाद नरमी दिखाते हुए पीयूष गोयल ने कहा "ऑनलाइन ई-कॉमर्स के जबरदस्त फायदे हैं, इसमें सुविधा का है, इसमें गति की सुविधा है।" भारत में, ग्लोबल ई-कॉमर्स कंपनियां मार्केटप्लेस बिजनेस के रूप में स्वतंत्र रूप से काम कर सकती हैं। हालांकि, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियम ग्लोबल खुदरा कंपनियों को ऑफ़लाइन रिटेस सेक्टर में स्वतंत्र रूप से काम करने से रोकते हैं। मल्टी-ब्रांड रिटेल में केवल 51 फीसदी तक एफडीआई की अनुमति है और वह भी स्थानीय भागीदारी के साथ। इसके बाद भी, सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है।

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