ग्रीन पोर्टफोलियो पीएमएस (Green Portfolio PMS) के फाउंडर दिवम शर्मा का मानना है कि यह मान लेना बहुत सही नहीं होगा कि प्राइमरी मार्केट 2023 के बाकी बचे भाग में भी उतना ही गर्म रहेगा जितना पहली छमाही में था। पहली छमाही में भारत एक्सचेंजों पर 80 कंपनियों की लिस्टिंग के साथ आईपीओ के लिहाज से दुनिया में टॉप पर था। जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में सिर्फ 60 आईपीओ लिस्ट हुए ये। यह बाजार की तेजी की भावनाओं का एक स्पष्ट संकेत है।
इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट का 15 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले शर्मा का कहना है कि सेबी ने 50000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के आईपीओ को मंजूरी दे दी है। लेकिन इसमें कितने आईपीओ वास्तव में बाजार में आते हैं ये मार्केट सेंटीमेंट पर निर्भर करेगा। बाजार में अब तक शानदार तेजी देखने को मिली। बाजार अब तक तमाम पॉजिटिव फैक्टर्स के असर को पचा भी चुका है। ऐसे में बाजार में लगातार 5 सालों तक इसी तरह की तेजी बनी रहेगी ये अतिआशावाद है। ऐसे में साल के बाकी बचे भाग में आईपीओ की गति थोड़ी धीमी पड़ने की उम्मीद है।
मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में दिवम ने आगे कहा कि अबतक काफी पिटाई सह चुके आईटी स्टॉक का हालत ठीक होने में अभी थोड़ा समय और लगेगा। आईटी कंपनियों के मुख्य बाजार अमेरिका और यूरोप में सुस्ती देखने को मिल रही है जिसकी मार अभी भी आईटी कंपनियों पर पड़ रही है। दिवम का ये भी मानना है कि आगे एफएमसीजी कंपनियों में हल्की ग्रोथ ही देखने को मिलेगी।
पहली तिमाही के नतीजों पर दिवम की राय
पहली तिमाही के नतीजों पर बात करते हुए दिवम शर्मा ने कहा कि बैंकिंग को छोड़कर, हमें पहली तिमाही के अब तक आए नतीजों में कुल मिलाकर दबाव ही देखने को मिला है। बैंकों में एनपीए स्तर में अच्छे सुधार के साथ-साथ मजबूत क्रेडिट ग्रोथ देखने को मिली। गाइडेंस में कमजोरी और आगे के लिए खराब आउटलुक के साथ आईटी कंपनियों ने निराश किया है।
केमिकल और फार्मा कंपनियों के प्रदर्शन में तिमाही आधार कमजोरी देखने को मिली है। कुछ कंपनियों को इन्वेंट्री लॉस हुआ है। आगे केमिकल और फार्मास्यूटिकल्स कंपनियों की ग्रोथ मुख्य रूप से वॉल्यूम पर आधारित होगी। वित्त वर्ष 2024 की दूसरी छमाही से इनमें ग्रोथ आने की उम्मीद है। इसके अलावा, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में पूरी तरह से रिकवरी शुरू होने से पहले पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाओं की निराशाजनक आर्थिक स्थिति के कारण मामूली मंदी देखने को मिल सकती है।
मध्यम अवधि में एफआईआई के निवेश पर दिख सकता है दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर बात करते हुए दिवम ने कहा कि पूरे यूरोप और अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों के चलते मध्यम अवधि में एफआईआई के निवेश पर असर पड़ेगा। अमेरिका और यूरोप के देश महंगाई की नकेल कसने के लिए ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं। दरों में बढ़ोतरी के अंत की शुरुआत अभी तक नहीं देखने को मिली है। इसका असर देश में होने वाले एफआईआई निवेश पर पड़ेगा। ऐसे में हम एफआईआई की निकासी की संभावना से भी इनकार नहीं कर सकते।
आईटी के प्रदर्शन में सुधार दिखने में लगेगा थोड़ा समय
आईटी सेक्टर पर बात करते हुए दिवम ने कहा कि आईटी के प्रदर्शन में सुधार दिखने में थोड़ा समय लगेगा। फाइनेंशियल और रिटेल सेक्टर आईटी कंपनियों के सबसे बड़े ग्राहक हैं। इनसे ही आईटी कंपनियों की 45 फीसदी कमाई होती है। बढ़ती ब्याज दरों, अमेरिका में इनवर्टेड यील्ड कर्व (इसमें शॉर्ट टर्म ब्याज दरें, लॉन्ग टर्म दरों से ज्यादा होती हैं) और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस में गिरावट का इन आईटी कंपनियों के बड़े ग्राहकों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। आईटी कंपनियों की स्थिति में सुधार इनके ग्राहकों की स्थिति में सुधार पर निर्भर करती है। इस साल अंत से हमें आईटी कंपनियों के ग्राहकों की स्थिति में सुधार को संकेत मिलने की उम्मीद दिख रही है।
FMCG सेक्टर में मध्यम ग्रोथ की उम्मीद
FMCG सेक्टर पर बात करते हुए दिवम ने कहा कि उन्हें इस सेक्टर में मध्यम स्तर के ग्रोथ की उम्मीद है। कमोडिटी की कीमतों में गिरावट के कारण इस सेक्टर के ग्रॉस मार्जिन में सुधार देखने को मिल रहा है। हालांकि, खाने-पीने की चीजों की महंगाई में बढ़त और उपभोक्ता खर्च में गिरावट की आशंका के चलते इस सेक्टर के वॉल्यूम ग्रोथ पर निगेटिव असर देखने को मिल सकता है।
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