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2022 में इन इवेंट्स पर रहे नजर, तय कर सकते हैं बाजार की दशा और दिशा

यूएस फेड बढती महंगाई को देखते हुए अपनी मौद्रिक नीतियों में कठोरता ला सकता है जिसके चलते ब्याज दरों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है और इकोनॉमी में लिक्विडिटी को कम करने के लिए बॉन्ड खरीद प्रोग्राम में तेज कटौती देखने को मिल सकता है।

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 13, 2021 पर 2:02 PM
2022 में इन इवेंट्स पर रहे नजर, तय कर सकते हैं बाजार की दशा और दिशा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार के लिए कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन से कितना खतरा है इस पर जल्दबाजी में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

2022 जल्द ही शुरु होने वाला है। ऐसे में आइए हम उन फैक्टर्स पर एक नजर डालें तो बाजार की दशा और दिशा तय करने में भूमिका निभाएंगे। बाजार जानकारों का कहना है कि ओमीक्रोन की स्थिति इंफलेशन, यूएस फेड की मौद्रिक नीति, चाइना के Evergrande के हालात, ताइवान से जुड़ी जियोपॉलिटिकल स्थित , उभरते बाजारों की दशा, ब्रैक्जिट पर लिए जाने वाले निर्णय, न्यूरो से जुड़ी परेशानियां , मिडिल ईस्ट में खाने -पीने की चीजों में हो रहे बढ़ोतरी कुछ ऐसे फैक्टर हैं जो आगे बाजार की दशा और दिशा पर असर डालते दिखेंगे।

इसके अलावा कुछ ऐसे भी फैक्टर है जिनको बाजार से सपोर्ट मिल सकता है। जैसे दुनियाभर की तमाम सरकारें, वित्तीय राहत को जारी रखने का फैसला ले सकते हैं। चाइना की नई पंच वर्षीय योजना से इन्वेस्टमेंट में तेजी आ सकती है। कोरोना पैंडेमिक की वजह से की गई बचत से ग्लोबल स्पेंडिंग में बढ़त देखने को मिल सकती है।

ओमीक्रोन और उससे जुड़ा जोखिम

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार के लिए कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रोन से कितना खतरा है इस पर जल्दबाजी में कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इतना साफ है कि यह अपने पहले के वर्जन की तुलना में ज्यादा संक्रामक है। यह ज्यादा संक्रामक होने के बावजूद कम खतरनाक हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो बाजार जल्द ही प्री-पैंडेमिक लेवल पर लौटता दिख सकता है। जिससे सेवाओं पर खर्च बढ़ता नजर आ सकता है। अगर यह वैरिएंट कम खतरनाक साबित होता है तो खर्च के रीबैलेसिंग से ग्लोबल ग्रोथ 4.7 फीसदी के अनुमान से भी ज्यादा हकर 5.1 फीसदी तक पहुंच सकती है। वहीं अगर यह वायरस ज्यादा घातक हुआ तो फिर लॉकडाउन के खतरे बढ़ जाएंगे । इंग्लैड जैसे देश इस दिशा में आगे बढ़ भी चुके हैं। अगर यह खतरा बढ़ता है तो 2022 में ग्लोबल ग्रोथ घटकर 4.2 फीसदी तक पहुंच सकती है। कोरोना का खतरा बढ़ने की स्थिति में डिमांड पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्या बढ़ती नजर आएगी।

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