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Front-Running Case: इनसाइडर ट्रेडिंग से कैसे अलग है फ्रंट-रनिंग? निवेशकों पर क्या होता है असर? समझें आसान भाषा में

Front-Running: बाजार नियामक सेबी ने संदीप टंडन के क्वांट म्यूचुअल फंड के मुंबई और हैदराबाद में स्थित ऑफिसों में खोजबीन अभियान चलाया और जब्ती भी की है। यह मामला फ्रंट-रनिंग से जुड़ा हुआ है। जानिए कि यह काम कैसे करता है, यह इनसाइडर ट्रेडिंग से अलग कैसे है और इसका आम निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा? क्वांट म्यूचुअल फंड से जुड़ा मामला कितना बड़ा है और सेबी इस प्रकार के मामले से कैसे निपट रही है?

Edited By: Moneycontrol Newsअपडेटेड Jun 24, 2024 पर 1:42 PM
Front-Running Case: इनसाइडर ट्रेडिंग से कैसे अलग है फ्रंट-रनिंग? निवेशकों पर क्या होता है असर? समझें आसान भाषा में
फ्रंट-रनिंग केसेज में सेबी आमतौर पर डीलर्स, फंड मैनेजर्स और आउटसाउड ब्रोकर्स पर जुर्माना लगाता है।

All details about Front-Running: ₹93000 करोड़ का एसेट मैनेज करने वाली क्वांट म्यूचुअल फंड बाजार नियामक सेबी की निगाह में आ गई है। इस पर फ्रंट रनिंग का संदेह जताया जा रहा है। मनीकंट्रोल को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक सेबी ने संदीप टंडन के क्वांट म्यूचुअल फंड के मुंबई और हैदराबाद में स्थित ऑफिसों में खोजबीन अभियान चलाया और जब्ती भी की है। म्यूचुअल फंड्स में फ्रंट रनिंग गैरकानूनी है। इसके तहत ब्रोकर या डीलर को आने वाले समय में किसी म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन के बारे में पता रहता है और चूंकि उन्हें इसकी जानकारी पहले ही हो जाती है तो वे इसका फायदा उठाते हैं।

अब सवाल ये उठता है कि यह काम कैसे करता है, यह इनसाइडर ट्रेडिंग से अलग कैसे है और इसका आम निवेशकों पर क्या असर पड़ेगा? क्वांट म्यूचुअल फंड से जुड़ा मामला कितना बड़ा है और सेबी इस प्रकार के मामले से कैसे निपट रही है?

Front-Running काम कैसे करता है?

म्यूचुअल फंड डीलर्स जैसे मीडिएटर्स के जरिए शेयरों की बड़ी खरीदारी-बिक्री करते हैं। अब चूंकि इन इंटरमीडियरीज को पहले ही सौदे के बारे में पता चल जाता है तो वे इसका फायदा उठा सकते हैं। जब म्यूचुअल फंड जैसा कोई बड़ा इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर मार्केट में शेयरों की खरीदारी के लिए एंट्री करने वाला होता है तो उससे कुछ मिनट पहले ही इंटरमीडियरीज शेयरों को खरीद लेते हैं। जब म्यूचुअल फंड शेयर खरीदते हैं तो भाव तेजी से उछलते हैं और इंटरमीडियरीज शेयर बेचकर मुनाफा कमा लेते हैं। वहीं अगर म्यूचुअल फंड शेयर बेचने वाले होते हैं तो इंटरमीडियरीज उनके ऑर्डर से कुछ ही मिनट पहले खुद शॉर्ट सेल कर देते हैं। खास बात ये है कि इंटरमीडियरीज ये ट्रेड्स अपने खुद के अकाउंट्स से नहीं करते हैं बल्कि एसोसिएट्स के अकाउंट्स के जरिए करते हैं।

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