RBI Norms for NBFC: केंद्रीय बैंक RBI ने अपर लेयर एनबीएफसी की पहचान के लिए गाइडलाइंस में बदलाव का ड्राफ्ट पेश किया है। इसके अलावा आरबीआई ने सरकार के स्वामित्व वाली एनबीएफसी के वर्गीकरण में भी बदलाव किए हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट के तहत आरबीआई अपर लेयर एनबीएफसी की पहचान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मौजूदा पैरामीट्रिक स्कोरिंग मॉडल को समाप्त करने और इसकी बजाय एक सरल और एसेट साइज-बेस्ड अप्रोच अपनाने की योजना बना रहा है। आरबीआई के नए फ्रेमवर्क से अपर लेयर एनबीएफसी में आईआरएफसी (IRFC) और पीएफसी (PFC) जैसों की एंट्री हो सकती है तो कुछ की विदाई भी हो सकती है।
क्या है NBFC को लेकर RBI के प्रस्तावित ड्राफ्ट में?
नए नियमों के तहत ₹1 लाख करोड़ और उससे अधिक के एसेट्स वाली एनबीएफसी को अपर लेयर में रखने का प्रस्ताव पेश किया गया है।
इसके अलावा आरबीआई ने टॉप 10 एनबीएफसी के अपने-आप अपर लेयर में शामिल होने की व्यवस्था को भी हटाने का प्रस्ताव दिया है, जो मौजूदा ढांचे से अलग है।
आरबीआई ने उन प्रतिबंधों को समाप्त करने का सुझाव दिया है जो सरकारी एनबीएफसी को अपर लेयर में जाने से रोकते हैं।
ड्राफ्ट में अपर लेयर कैटेगरी में रखने के समय राज्य सरकार की गारंटी वाले असीमित एक्सपोजर को घटाने की मंजूरी देने का प्रस्ताव पेश किया गया है।
आरबीआई ने ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में अपर लेयर की पहचान को समय-समय पर क्राइटेरिया तय करने का प्रस्ताव रखा है जिसमें एसेट थ्रेशहोल्ड को हर पांच साल में एसेसमेंट किया जाएगा।
आरबीआई ने फ्रेमवर्क में पैरामेट्रिक शब्द को प्रेस्क्राइब्ड से बदल दिया है।
अपर लेयर में आने के बाद एनबीएफसी एक एंटिटी को अधिकतम 20% और एक ग्रुप को 25% कर्ज दे पाएंगे जबकि अभी यह लिमिट एक एंटिटी के लिए 25% और ग्रुप के लिए 40% है।
आरबीआई ने अपर लेयर एनबीएफसी के लिए कैपिटल, गवर्नेंस और डिस्क्लोजर्स में हाई स्टैंडर्ड समेत सख्त नियामकीय जरूरतों का प्रावधान रखा है।
नए फ्रेमवर्क के तहत किसकी-किसकी हो सकती है अपर लेयर में एंट्री?
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