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IRFC, REC और HUDCO में पैसे लगाने से पहले; समझ लें RBI के प्रस्ताव को

RBI Norms for NBFC: आरबीआई ने अपर लेयर की एनबीएफसी में शामिल होने को लेकर एक ऐसा फ्रेमवर्क पेश किया जो सरकारी कंपनियों आईआरएफसी (IRFC) और आरईसी (REC) इत्यादि को झटका दे सकती है। जानिए कि आरबीआई के नए फ्रेमवर्क में क्या प्रस्ताव है और इससे सरकारी एनबीएफसी को झटका क्यों लग सकता है

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Apr 13, 2026 पर 8:48 AM
IRFC, REC और HUDCO में पैसे लगाने से पहले; समझ लें RBI के प्रस्ताव को

RBI Norms for NBFC: केंद्रीय बैंक RBI ने अपर लेयर एनबीएफसी की पहचान के लिए गाइडलाइंस में बदलाव का ड्राफ्ट पेश किया है। इसके अलावा आरबीआई ने सरकार के स्वामित्व वाली एनबीएफसी के वर्गीकरण में भी बदलाव किए हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट के तहत आरबीआई अपर लेयर एनबीएफसी की पहचान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मौजूदा पैरामीट्रिक स्कोरिंग मॉडल को समाप्त करने और इसकी बजाय एक सरल और एसेट साइज-बेस्ड अप्रोच अपनाने की योजना बना रहा है। आरबीआई के नए फ्रेमवर्क से अपर लेयर एनबीएफसी में आईआरएफसी (IRFC) और पीएफसी (PFC) जैसों की एंट्री हो सकती है तो कुछ की विदाई भी हो सकती है।

क्या है NBFC को लेकर RBI के प्रस्तावित ड्राफ्ट में?

नए नियमों के तहत ₹1 लाख करोड़ और उससे अधिक के एसेट्स वाली एनबीएफसी को अपर लेयर में रखने का प्रस्ताव पेश किया गया है।

इसके अलावा आरबीआई ने टॉप 10 एनबीएफसी के अपने-आप अपर लेयर में शामिल होने की व्यवस्था को भी हटाने का प्रस्ताव दिया है, जो मौजूदा ढांचे से अलग है।

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