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Market outlook : अगर US-ईरान संघर्ष लंबा खिंचा तो शुरू हो सकता है गिरावट का नया दौर - वालट्रस्ट के राहुल भूतोरिया

Market outlook : वालट्रस्ट के राहुल भूतोरिया का कहना है कि चौथी तिमाही में एविएशन,लॉजिस्टिक्स,पेंट्स और केमिकल्स पर ईरान युद्ध का असर दिख सकता है। अगर US-ईरान संघर्ष लंबा चलता है तो रीप्राइसिंग का दूसरा चरण देखने को मिल सकता जिसकी वजह युद्ध का डर नहीं,बल्कि फंडामेंटल्स में कमजोरी होगी

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Mar 08, 2026 पर 1:21 PM
Market outlook : अगर US-ईरान संघर्ष लंबा खिंचा तो शुरू हो सकता है गिरावट का नया दौर - वालट्रस्ट के राहुल भूतोरिया
राहुल भूतोरिया ने कहा कि हेल्थकेयर के वैल्यूशन अच्छे नजर आ रहे हैं। इनमें भी घरेलू फॉर्मूलेशन और हॉस्पिटल चेन ज्यादा अच्छे दिख रहे हैं

Market outlook : मार्केट अभी यह मान कर चल रहा है कि मिडल-ईस्ट में चल रहा तनाव जल्द ही कम होगा। अगर यह अंदाज़ा सही साबित होता है तो बाजार को राहत मिलेगी। अगर US-ईरान संघर्ष लंबा चलता है तो रीप्राइसिंग का दूसरा चरण देखने को मिल सकता जिसकी वजह युद्ध का डर नहीं,बल्कि फंडामेंटल्स में कमजोरी होगी। सेंट्रल बैंक ग्रोथ और इन्फ्लेशन के ट्रेंड पर कैसे प्रतिक्रया करेगा, इसके शुरुआती संकेतों के लिए RBI की अप्रैल पॉलिसी कमेंट्री पर फोकस रहेगा। ये बातें वालट्रस्ट के डायरेक्टर और को-फाउंडर राहुल भूतोरिया ने कही हैं।

मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा अगर क्रूड का एवरेज प्राइस लंबे समय तक 90 डॉलर से ऊपर बनी रहता है तो फिस्कल प्रेशर और आगे मॉनेटरी ढील की कम गुंजाइश के चलते इकोनॉमिक ग्रोथ में 25–30 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है। ऐसे में RBI की अप्रैल पॉलिसी कमेंट्री पर करीब नजर रखनी चाहिए, ताकि इस बात के शुरुआती सिग्नल मिल सकें कि सेंट्रल बैंक ग्रोथ-इन्फ्लेशन ट्रेड-ऑफ को कैसे देख रहा है।

क्या आपको लगता है कि फीयर का पीक मार्केट में पहले ही तय हो चुका है,जब तक कि ईरान में कोई ऐसी घटना न हो जाए जिसकी उम्मीद न हो?

मार्केट ने जियोपॉलिटिकल झटके का कुछ हद तक अंदाज़ा लगा लिया है,लेकिन पूरे मैक्रो असर का अंदाजा नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही पर रुकावट से कच्चे तेल में तेजी और इक्विटी जैसे रिस्क एसेट्स में बिकवाली शुरू हो गई। यह तात्कालिक प्रतिक्रिया अब हल्की पड़ गई है। जिस चीज़ का अभी तक पूरी तरह अंदाज़ा नहीं लगाया गया है,वह है कि अगर यह बाधा बनी रहती है तो इसके आर्थिक नतीजे क्या होंगे? इससे भारत के करंट अकाउंट घाटे में बढ़ोतरी हो सकती है,रुपये पर दबाव बढ़ सकता है और महंगे क्रूड से महंगाई में तेजी आ सकती है।

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