Market outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 21 जनवरी को कैसी रह सकती है इनकी चाल
Stock market today : BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.5% की गिरावट आई। निफ्टी के सबसे बड़े लूजर्स में Eternal, Bajaj Finance, Coal India, Adani Enterprises और Jio Financial शामिल रहे। जबकि गेनर्स में Tata Consumer Products, Dr Reddy's Lab और HDFC Bank शामिल रहे
Market outlook : एक्सिस सिक्योरिटीज की राय है कि बैंक निफ्टी 60,000 के लेवल के आसपास है जो मौजूदा एक्सपायरी के लिए एक अहम पिवट का काम कर रहा है। इसके लिए 59,500 एक मज़बूत सपोर्ट ज़ोन है
Stock market : 20 जनवरी को सभी सेक्टर्स में बिकवाली के कारण भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स कमजोर बंद हुए, निफ्टी 25,250 से नीचे चला गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1065.78 अंक या 1.28 फीसदी गिरकर 82,180.47 पर और निफ्टी 353 अंक या 1.38 फीसदी गिरकर 25,232.50 पर बंद हुआ। लगभग 748 शेयरों में तेजी आई, 3146 शेयरों में गिरावट आई और 100 शेयर अपरिवर्तित रहे। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, जिसमें रियल्टी इंडेक्स 5% गिरा, जबकि ऑटो, IT, मीडिया, मेटल, PSU बैंक, फार्मा, ऑयल एंड गैस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.5-2.5 प्रतिशत गिरे।
BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.5% की गिरावट आई। निफ्टी के सबसे बड़े लूजर्स में Eternal, Bajaj Finance, Coal India, Adani Enterprises और Jio Financial शामिल रहे। जबकि गेनर्स में Tata Consumer Products, Dr Reddy's Lab और HDFC Bank शामिल रहे।
एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इन्वेस्टर्स को इस समय बड़े रिस्क लेने से बचना चाहिए और लॉन्ग टर्म के लिए अच्छी क्वालिटी के स्टॉक्स खरीदने चाहिए। इस बात की उम्मीद बनी हुई है कि भारत और अमेरिका जल्द ही एक ट्रेड डील को फाइनल कर लेंगे।
एक्सपर्ट की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का कहना है कि ट्रंप की कारगुजारियों को ध्यान में रखते हुए भारतीय इन्वेस्टर्स को तुरंत एक्शन लेने के बजाय बदलती स्थितियों पर नज़र रखनी चाहिए। अगर इन ग्लोबल घटनाओं की प्रतिक्रिया में मार्केट में तेज़ गिरावट आती है,तो इन्वेस्टर्स धीरे-धीरे स्टॉक एक्युमुलेट करने की रणनीति अपनानी चाहिए
इस समय निवेशकों को देखना और इंतज़ार करना चाहिए। इस स्टेज पर वैल्यूएशन आकर्षक नहीं हैं। आखिरकार,मार्केट में आने वाली कोई भी मजबूत तेज़ी अर्निंग्स रिकवरी पर ही निर्भर करेगी। उनकी सलाह है कि निवेशकों को इस समय बैंकिंग और ऑटो सेक्टर पर नज़र रखनी चाहिए। इसके अलावा,ग्लोबल हालात नॉर्मल होने पर डिजिटल और न्यू-एज कंपनियां भी मज़बूती से वापसी कर सकती हैं। इस सेक्टर के शेयरों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद खरीदारी की रुचि बनी हुई है। इनमें अगले पांच से दस सालों में 15-20% रेवेन्यू ग्रोथ का पोटेंशियल नजर आ रहा है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि हाल के निचले स्तरों के पास सपोर्ट लेने के बाद निफ्टी का लोअर बोलिंगर बैंड से ऊपर वापस जाना अच्छा संकेचहै। हालांकि,उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निफ्टी 25,550 के लेवल से ऊपर टिके रहने में नाकाम रहता है तो शॉर्ट टर्म में तेजी की संभावना सीमित हो सकती है।
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि चल रहे ट्रांसअटलांटिक ट्रेड टेंशन के बीच बुल कमजोर पड़ते गए और बेयर्स ने फिर से कंट्रोल कर लिया है। सपोर्ट कमजोर दिख रहे थे क्योंकि मजबूत इंस्टीट्यूशनल सेलिंग की वजह से निफ्टी उन्हें तोड़ता जा रहा है। इंडिकेटर्स बेयरिश क्रॉसओवर में बने हुए हैं और ओवरसोल्ड ज़ोन के करीब पहुंच रहे हैं। डेली चार्ट पर, इंडेक्स 200-DMA की ओर बढ़ता दिख रहा है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 25,100–25,150 के आसपास दिख रहा है। अगर यह लेवल बना रहता है, तो एक अच्छा पुलबैक देखने को मिल सकता है।
बैंक निफ्टी टेक्निकल व्यू
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज़ का कहना है कि बैंक निफ्टी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और 60,200 के पास हल्के रेजिस्टेंस के बावजूद बुलिश स्ट्रक्चर बनाए हुए है। ब्रोकरेज की राय है कि इस लेवल से ऊपर लगातार मूवमेंट से और तेज़ी आ सकती है। जबकि, नीचे की ओर 59,200–58,900 का ज़ोन एक मज़बूत सपोर्ट का काम कर सकता है।
वहीं, एक्सिस सिक्योरिटीज की राय है कि बैंक निफ्टी 60,000 के लेवल के आसपास है जो मौजूदा एक्सपायरी के लिए एक अहम पिवट का काम कर रहा है। इसके लिए 59,500 एक मज़बूत सपोर्ट ज़ोन है, जिसे भारी पुट ओपन इंटरेस्ट का सपोर्ट मिल रहा है। जबकि 60,000 इसके लिए अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है, इसकी पुष्टि इस स्तर पर सबसे ज़्यादा कॉल ओपन इंटरेस्ट होने से होती है।
चॉइस ब्रोकिंग का कहना है कि बैंक निफ्टी ने 59,800–60,000 के पास रिलेटिव स्ट्रेथ दिखाई, लेकिन 60,000 के आसपास की हिचकिचाहट बैंकिंग सेक्टर में अनिश्चितता को दिखाती है। 60,000 से ऊपर ब्रेकआउट शॉर्ट-टर्म बुलिश सेंटिमेंट को फिर से ज़िंदा कर सकता है, जबकि 59,500–59,600 का टूटना लंबे समय तक कंसोलिडेशन का संकेत दे सकता है।
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