आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 9 अक्टूबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश की। इसमें उन्होंने कई इकोनॉमी की सेहत और बैकिंग-एनबीएफसी सेक्टर के बारे में कई बातें कहीं। लेकिन, एनबीएफसी सेक्टर के बारे में उन्होंने कुछ खास बातें कही। उन्होंने फाइनेंशियल इनक्लूजन की एनबीएफसी कंपनियों की कोशिशों का उल्लेख किया। लेकिन, ग्रोथ के लिए आक्रामक रुख को लेकर उन्होंने एनबीएफसी को सावधान भी किया।
बिजनेस बढ़ाने के लिए नियमों की हो रही अनदेखी
दास ने कहा कि कई NBFC रिस्क मैनेजमेंट का ध्यान नहीं रख रही हैं। साथ ही उनका बिजनेस मॉडल भी टिकाऊ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एनबीएफसी सेक्टर की सेहत ठीक है। लेकिन, कुछ ऐसी चीजें हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। पिछले कुछ सालों में एनबीएफसी सेक्टर की ग्रोथ अच्छी रही है। लेकिन, बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए इनके बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा दिख रही है। एनबीएफसी में माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (MFI) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFC) शामिल हैं।
एंप्लॉयीज पर भी बढ़ रहा वर्क प्रेशर
छोटे-बड़े एनबीएफसी रिटर्न ऑन इक्विटी बढ़ाने के लिए ऐसे बिजनेस टारगेट रख रहे हैं, जिन्हें पूरा करना बहुत मुश्किल है। इससे एंप्लॉयीज पर भी अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है। हाल में एक बड़ी एनबीएफसी के एक 42 साल के एंप्लॉयी के सुसाइड करने की खबर आई। उसने सुसाइड नोट में वर्क प्रेशर को आत्महत्या की वजह बताई थी। उसके परिवार के सदस्यों का भी कहना था कि कंपनी में उसके सीनियर अधिकारी लोन रिकवरी का टारगेट पूरा करने के लिए उस पर दबाव बनाते थे।
पूरे सेक्टर के लिए पैदा हो सकता है खतरा
आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ का एनबीएफसी सेक्टर पर खराब असर पड़ेगा। इससे इंटरेस्ट रेट बढ़ सकता है। ग्राहक पर कर्ज का बोझ बहुत बढ़ सकता है। अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो सेक्टर की फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के लिए रिस्क पैदा हो सकता है। उन्होंने एनबीएफसी को अपने एक्सपोजर का आकलन करने को कहा। खासकर अनसेक्योर्ड लोन सेगमेंट में सावधानी बरतने को कहा।
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कमियां दूर नहीं हुईं तो कार्रवाई करेगा आरबीआई
केंद्रीय बैंक के प्रमुख ने कुछ एनबीएफसी के ग्राहकों से बहुत ज्यादा इंटरेस्ट लेने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे ग्राहकों पर बहुत खराब असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि एनबीएफसी को खुद ही इन चीजों पर ध्यान देने और कमियां दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की इस पर करीबी नजर है और जरूरत पड़ने पर वह कार्रवाई करेगा।