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नए जमाने के टेक शेयरों के लिए अभी और दर्द बाकी : कोटक

भारत में पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा है। इसी अनुपात में इसमें बिकवाली भी देखने को मिली है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में भारत से 14 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बाहर जाता दिखा। इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले 18 महीनों में आईपीओ की गति धीमी पड़ गई है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 17, 2023 पर 10:55 AM
नए जमाने के टेक शेयरों के लिए अभी और दर्द बाकी : कोटक
पिछले 18 महीनों में आईपीओ की गति धीमी पड़ गई है। लेकिन शेयर होल्डिंग के पैटर्न और बल्क डील के आंकड़ो के विश्लेषण से पता चलता है कि सेकेंडरी मार्केट में नए जमाने की टेक आधारिक कंपनियों में बिकवाली बढ़ती नजर आई है

नए जमाने के इंटरनेट आधारित टेक शेयरों को अभी और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि अभी और प्री-आईपीओ निवेशक अब इन शेयरों से निकलते नजर आ सकते हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबित मार्च 2023 तक प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्मों की लिस्टेड भारतीय इंटरनेट कंपनियों में लगभग 7 अरब डॉलर की हिस्सेदारी थी। कोटक का मानना है कि अगर बाजार इतना वोलैटाइल न होता तो ये हिस्सेदारी और कम होती।

बाजार की स्थितयां खराब होने के कारण बिकवाली की योजना टली

कोटक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि कमजोर बाजार स्थितियों और हाल ही में कुछ भारतीय इंटरनेट कंपनियों की डिरेटिंग की वजह से प्री-आईपीओ निवेशकों ने इन कंपनियों में अपनी बिकवाली की योजना को होल्ड पर रखा है। बाजार की स्थितयां सुधरते ही ये बिकवाली होती दिख सकती है।

भारत में पिछले कुछ वर्षों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ा

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