नए जमाने के इंटरनेट आधारित टेक शेयरों को अभी और मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि अभी और प्री-आईपीओ निवेशक अब इन शेयरों से निकलते नजर आ सकते हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबित मार्च 2023 तक प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल फर्मों की लिस्टेड भारतीय इंटरनेट कंपनियों में लगभग 7 अरब डॉलर की हिस्सेदारी थी। कोटक का मानना है कि अगर बाजार इतना वोलैटाइल न होता तो ये हिस्सेदारी और कम होती।
