नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने मेगा IPO के लिए एडवाइजरी फीस, इश्यू साइज के लगभग 0.65% पर तय की है। IPO का साइज 2.5 अरब डॉलर (लगभग 23,085 करोड़ रुपये) रहने का अनुमान है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि इश्यू साइज के आधार पर कुल फीस पूल लगभग 1.62 करोड़ डॉलर हो सकता है। इसका ज्यादातर हिस्सा 6 लीड बैंकों के बीच बांटा जाएगा।
LSEG के डेटा के अनुसार, पिछले साल 417 कंपनियों ने IPO के लिए इश्यू साइज के लगभग 1.86% के बराबर औसत एडवाइजरी फीस दी। 2024 में 350 इश्यूअर्स ने 1.67% फीस दी। NSE ने पिछले हफ्ते IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस बंपर इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया है।
सरकारी कंपनियों के IPO में कम एडवाइजरी फीस
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, NSE IPO के लिए तुलनात्मक रूप से कम एडवाइजरी फीस भारत में सरकार से जुड़े या अर्ध-सरकारी इश्यू के मामले में एक व्यापक चलन को दर्शाती है। इनमें इश्यूअर्स लागत पर कड़ा नियंत्रण रखते हैं, लिहाजा कम फीस की पेशकश करते हैं। कुछ मामलों में बैंक, बड़े इश्यूज से मिलने वाली प्रतिष्ठा और 'लीग टेबल' में बेहतर स्थिति के बदले नाममात्र की फीस स्वीकार कर लेते हैं।
इस साल की शुरुआत में भारतीय स्टेट बैंक और फ्रांस की Amundi SA ने SBI फंड मैनेजमेंट के 1.4 अरब डॉलर के प्लांड IPO के लिए लगभग 0.01% फीस की पेशकश की थी। कुछ बैंकरों ने इस स्तर को 'बिल्कुल न्यूनतम' (rock-bottom) बताया था, जिसके चलते कुछ वैश्विक फर्मों ने इस इश्यू से किनारा कर लिया। अतीत में जाएं तो LIC ने 2021 में इश्यू साइज का लगभग 0.58% फीस के तौर पर दिया, जबकि NTPC Green Energy ने लगभग 0.54% फीस के तौर पर दिया।
प्राइवेट सेक्टर के IPOs में क्या चलन
इसके उलट प्राइवेट-सेक्टर की डील्स ज्यादा फायदेमंद रही हैं। Hyundai Motor India के 2024 में आए IPO में फीस और कमीशन के तौर पर लगभग 4.93 अरब रुपये, या इश्यू साइज का 1.77% दिया गया। यह देश में इस तरह का अब तक का सबसे बड़ा पेमेंट है। LG Electronics ने अपनी इंडिया यूनिट के 1.3 अरब डॉलर के IPO के लिए 5 बैंकों को लगभग 226 करोड़ रुपये, या इश्यू साइज का 1.94% दिया।
NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि इसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे। टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई. और LIC, NSE IPO में शेयर बेच सकते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड भी इस IPO में शेयर बेच सकते हैं। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।
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