Ola Electric Mobility Shares: ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में शुक्रवार 10 अप्रैल को भी तूफानी तेजी जारी रही। कारोबार के दौरान यह शेयर 8.73 प्रतिशत बढ़कर 39.49 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। लगातार छह महीने की गिरावट के बाद इस स्टॉक ने पिछले कुछ दिनों जोरदार वापसी की है। अप्रैल अब तक यह शेयर करीब 72 प्रतिशत तक उछल चुका है। इस महीने अब तक सात में से छह कारोबारी दिन यह शेयर हरे निशान में रहा है।
यह तेजी पिछले छह महीनों की भारी गिरावट के बाद आई है। ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में अक्टूबर से गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ था और स्टॉक ने अपनी करीब 85 प्रतिशत वैल्यू गंवा दी थी। इस दौरान इसके शेयर 21.21 रुपये के ऑल-टाइम लो स्तर तक गिर गए और निवेशकों की करीब 9,000 करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई थी।
एनालिस्ट्स के मुताबिक, इस गिरावट की बड़ी वजह कमजोर बिक्री, घटता मार्केट शेयर, ज्यादा कैश बर्न, कंपनी के बढ़ते घाटे और एक्जिक्यूशन से जुड़े मुद्दे थे, जिनसे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
ओला इलेक्ट्रिक के शेयर में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण कंपनी का हालिया तकनीकी ऐलान माना जा रहा है। ओला इलेक्ट्रिक ने अपने इन-हाउस विकसित लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरी की तैयारी पूरी होने की जानकारी दी है। कंपनी ने बताया कि उसका 46100 फॉर्मेट LFP सेल तैयार हो गया है, जो मौजूदा NMC 4680 भारत सेल से बड़ा है और स्केल, लागत और उपयोगिता के लिहाज से बेहतर है।
कंपनी के अनुसार, इन नए सेल्स को अगले क्वार्टर से उसके इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे लागत में कमी और प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है।
इसके अलावा, बाजार में यह संकेत भी मिला है कि कंपनी के इलेक्ट्रिक-टूव्हीलर की डिमांड अब स्थिर हो सकती है। मार्च महीने में व्हीकल रजिस्ट्रेशन बढ़कर करीब 10,117 यूनिट तक पहुंच गए, जो फरवरी के 3,973 यूनिट के मुकाबले काफी ज्यादा है। मार्च के आखिरी हफ्ते में रोजाना ऑर्डर भी 1,000 यूनिट के पार चले गए, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है कि डिमांड पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
हाल के महीनों में सर्विस से जुड़ी समस्याओं का सामना करने वाली कंपनी ने यह भी दावा किया है कि अब 80 प्रतिशत से ज्यादा वाहनों की सर्विस एक दिन में पूरी की जा रही है, जो कस्टमर एक्सपीरिएंस में सुधार का संकेत है।
इसके साथ ही कंपनी ने अपने Roadster 9.1 मॉडल की कीमत में 60,000 रुपये तक की कटौती का ऐलान किया है। यह कटौती सेल प्रोडक्शन बढ़ने से आई लागत में कमी के चलते संभव हो पाई है।
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