पारले इंडस्ट्रीज के अपर सर्किट से सिग्नल में 5100% उछाल तक... 5 मामले जब नाम के चलते 'गलत शेयरों' में मचा तूफान

Melody टॉफी से जुड़े वायरल वीडियो के बाद Parle Industries का शेयर भाग गया, जबकि कंपनी का उससे कोई संबंध नहीं था। यह पहला मामला नहीं है। जानिए 5 बड़े किस्से, जहां सिर्फ नाम की वजह से बाजार में तूफान मच गया था।

अपडेटेड May 20, 2026 पर 6:00 PM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 मई को इटली के दौरान वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘Melody’ टॉफी गिफ्ट की।

मशहूर ब्रिटिश साहित्यकार विलियम शेक्सपियर ने अपने रोमियो जूलियट नाटक में लिखा था, 'नाम में क्या रखा है? गुलाब को किसी और नाम से बुलाओ, उसकी खुशबू तो वही रहेगी।' लेकिन, ये फलसफा शेयर मार्केट में फिट नहीं बैठता। यहां नाम में बहुत कुछ रखा होता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 मई को इटली के दौरान वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘Melody’ टॉफी गिफ्ट की। इसके बाद Parle Industries के शेयरों में जमकर खरीदारी शुरू हो घई। वजह सिर्फ इतनी थी कि कंपनी के नाम में ‘Parle’ शब्द था। जबकि सच यह है कि Melody टॉफी Parle Products बनाती है। Parle Industries का इन दोनों से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बावजूद उसके शेयरों में शेयर अपर सर्किट लग गया।

लेकिन शेयर बाजार में नाम के भ्रम से होने वाली ऐसी रैलियां पहली बार नहीं हुई हैं। आइए जानते हैं 5 मामले, जब सिर्फ नाम के चलते शेयरों में भारी हलचल दिखी।


कोविड में Bombay Oxygen

ऐसा ही एक बड़ा मामला अप्रैल 2021 में देखने को मिला था। उस समय भारत कोविड की दूसरी लहर से जूझ रहा था। अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी थी और हर तरफ ऑक्सीजन सिलेंडर की चर्चा हो रही थी। इसी माहौल में निवेशकों ने ऑक्सीजन से जुड़ी कंपनियों के शेयर खरीदने शुरू कर दिए।

इसका फायदा Bombay Oxygen Investments Ltd को मिला। दिलचस्प बात यह थी कि कंपनी 2019 में ही ऑक्सीजन बनाने का कारोबार बंद कर चुकी थी और अब मुख्य रूप से NBFC की तरह काम कर रही थी। यह स्टॉक 12 ट्रेडिंग सेशन से भी कम समय में करीब 131 प्रतिशत चढ़ गया था।

एलन मस्क के ट्वीट का असर

जनवरी 2021 में एलन मस्कस के एक छोटे से ट्वीट ने भी ऐसा ही भ्रम पैदा कर दिया था। Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक मस्क ने ट्वीट किया था... ‘Use Signal.’ उनका मतलब एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप Signal इस्तेमाल करने से था। लेकिन निवेशकों ने गलती से Signal Advance Inc नाम की एक दूसरी अमेरिकी माइक्रोकैप कंपनी के शेयर खरीदने शुरू कर दिए।

ट्वीट के तुरंत बाद शेयर छह गुना से ज्यादा चढ़ गया। अगले तीन ट्रेडिंग सेशन में इसमें 5,100 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आ गई। जबकि कंपनी का Signal ऐप से कोई संबंध ही नहीं था।

Zoom के नाम पर भी निवेशकों में भ्रम हुआ

कोविड महामारी के दौरान जब वर्क फ्रॉम होम तेजी से बढ़ा, तब वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म Zoom Video Communications पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय हो गया। लेकिन कई निवेशकों ने गलती से Zoom Technologies Inc के शेयर खरीद लिए, क्योंकि दोनों कंपनियों के नाम और टिकर सिंबल काफी मिलते-जुलते थे।

इस भ्रम की वजह से Zoom Technologies के शेयरों में भी तेज उछाल देखने को मिला। बाद में हालात ऐसे हो गए कि कंपनी को अपना टिकर सिंबल बदलकर ZOOM से ZTNO करना पड़ा।

LG Electronics India के IPO में भी हुई गड़बड़ी

भारत में भी ऐसा मामला 15 अक्टूबर 2025 को देखने को मिला था, जब LG Electronics India की शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई। कई लोगों ने गलती से कोयंबटूर की ऑटो कंपोनेंट कंपनी LG Balakrishnan & Bros Ltd के शेयर खरीद लिए। जबकि इस कंपनी का LG Electronics से कोई संबंध नहीं था।

शेयर इंट्रा-डे में करीब 15 प्रतिशत चढ़कर 1,600 रुपये तक पहुंच गया। लेकिन बाद में निवेशकों को अपनी गलती का एहसास हुआ और शेयर गिर गया। आखिर में यह 1.6 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,367.60 रुपये पर बंद हुआ।

Eli Lilly को लगा था बड़ा झटका

ऐसे मामलों में हर बार फायदा नहीं होता, नुकसान भी हो जाता है। 2022 में अमेरिकी दवा कंपनी Eli Lilly and Company को एक फर्जी ट्विटर अकाउंट की वजह से बड़ा झटका लगा था। दरअसल, एलन मस्क के ट्विटर टेकओवर के बाद पेड ब्लू टिक सिस्टम शुरू हुआ था। इसी दौरान किसी ने Eli Lilly के नाम से फेक वेरिफाइड अकाउंट बनाकर ट्वीट कर दिया, 'इंसुलिन अब मुफ्त है।'

यह ट्वीट तेजी से वायरल हो गया और लोगों को लगा कि कंपनी ने सच में इंसुलिन मुफ्त करने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद निवेशकों में कन्फ्यूजन फैल गया और रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी की मार्केट वैल्यू को करीब 15 अरब डॉलर यानी 1.45 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का झटका लगा।

यह रकम कितनी बड़ी रकम है, इसका अंदाजा आप यूं लगाइए कि टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल का मार्केट कैप 1.30 लाख करोड़ है। बाद में कंपनी को सफाई जारी करनी पड़ी कि यह फेक अकाउंट था, लेकिन तब तक झटका लग चुका था।

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