PM मोदी के नेतृत्व में फल-फूल रहे हैं PSUs, 3 साल में 81 कंपनियों का मार्केट कैप 225% बढ़ा: वित्त मंत्री सीतारमण

वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड पर भी दुर्भावनापूर्ण हमला किया था। उनके दावों के विपरीत नरेंद्र मोदी सरकार में एचएएल का मार्केट कैप केवल 4 वर्षों में 1370% बढ़ गया है। सीतारमण ने आगे लिखा कि विनिवेश के बाद लोगों के नौकरियां खोने के संबंध में भी झूठे दावे किए गए हैं। मोदी सरकार की पहल से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को यूपीए द्वारा पैदा किए गए बैंकिंग संकट से उबरने में मदद मिली है

अपडेटेड May 08, 2024 पर 2:02 PM
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वित्त मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय पर मोदी सरकार के फोकस के कारण पीएसयू के स्टॉक प्रदर्शन में भी पर्याप्त वृद्धि हुई है।

कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) को नुकसान उठाना पड़ा था। वहीं मोदी सरकार के कार्यकाल में 81 लिस्टेड PSU का कुल मार्केट कैप 225 प्रतिशत बढ़ा है। यह बात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए सरकारी कंपनियों की स्थिति को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी के आरोपों के करारे जवाब दिए। जिन 81 PSUs की बात वित्त मंत्री ने की, उनमें 62 सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेस (CPSEs), 12 पब्लिक सेक्टर बैंक, 3 पब्लिक सेक्टर इंश्योरेंस कंपनियां और IDBI Bank शामिल है।

वित्त मंत्री (Nirmala Sitharaman) ने X प्लेटफॉर्म पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'कांग्रेस पार्टी और उसके नेता राहुल गांधी के, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वर्तमान सरकार में खत्म होने और परेशानी झेलने के आरोप, ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ का एक उदाहरण है क्योंकि तथ्य एक बहुत अलग तस्वीर पेश करते हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के तहत PSUs को नुकसान हुआ है। जिन PSUs ने पहले यूपीए सरकार के तहत उपेक्षा झेली, जैसे कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), उन्होंने मोदी सरकार के तहत पुनरुत्थान देखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पीएसयू फल-फूल रहे हैं और ऑपरेशनल फ्रीडम में वृद्धि के साथ-साथ उनमें व्याप्त प्रोफेशनलिज्म की संस्कृति से काफी लाभान्वित हो रहे हैं। पूंजीगत व्यय पर मोदी सरकार के फोकस के कारण पीएसयू के स्टॉक प्रदर्शन में भी पर्याप्त वृद्धि हुई है।'

वित्त मंत्री ने आगे लिखा, 'मैनेजमेंट इंसेंटिव के बेहतर अलाइनमेंट; डिविडेंड, बायबैक आदि पर कैपिटल मैनेजमेंट गाइडलाइंस और विनिवेश रणनीति के कैलिब्रेशन ने सीपीएसई के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद की है और उनमें निवेशकों का विश्वास बहाल किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, बिजली, लॉजिस्टिक्स आदि पर फोकस से रेलवे, सड़क, बिजली, मेटल, कंस्ट्रक्शन, भारी उपकरण निर्माण आदि में सार्वजनिक उपक्रमों को सीधे लाभ हुआ है।'


PSB में ग्रॉस NPA 10 वर्ष के लो पर

वित्त मंत्री ने पब्लिक सेक्टर बैंकों को लेकर कहा कि मोदी सरकार की पहल से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को यूपीए द्वारा पैदा किए गए बैंकिंग संकट से उबरने में मदद मिली है। पीएसबी में ग्रॉस एनपीए, दशक के निचले स्तर 3.2% पर आ गया है और मुनाफा रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। फाइनेंशियल इंक्लूजन पर जोर से देश के हर कोने में फॉर्मल बैंकिंग की पहुंच है।

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ये पॉइंट्स भी गिनाए

1. 31 मार्च, 2023 तक सभी सीपीएसई की कुल चुकता पूंजी ₹5.05 लाख करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2014 के ₹1.98 लाख करोड़ के मुकाबले 155% ज्यादा है।

2. वित्त वर्ष 2023 के दौरान सीपीएसई के ऑपरेशंस से कुल ग्रॉस रेवेन्यू ₹37.90 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2014 के ₹20.61 लाख करोड़ से 84% की वृद्धि दर्शाता है।

3. प्रॉफिट मेकिंग सीपीएसई का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2023 में ₹2.41 लाख करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2014 में यह ₹1.29 लाख करोड़ था। इस तरह वृद्धि 87% की रही।

4. उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क, जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स, डिविडेंड आदि के माध्यम से सरकारी खजाने में सभी सीपीएसई का योगदान वित्त वर्ष 2023 में ₹4.58 लाख करोड़ था। यह वित्त वर्ष 2014 के ₹2.20 लाख करोड़ के योगदान से 108% अधिक है।

5. सभी सीपीएसई की नेट वर्थ 31 मार्च 2014 के ₹9.5 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2023 तक ₹17.33 लाख करोड़ हो गई, जो 82% की वृद्धि है।

6. 31 मार्च 2023 तक सभी सीपीएसई द्वारा एंप्लॉयड कैपिटल ₹38.16 लाख करोड़ थी, जो 31 मार्च 2014 के ₹17.44 लाख करोड़ के मुकाबले 119% ज्यादा है।

3 वर्षों में PSU के शेयर की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि

वित्त मंत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि पीएसयू के बेहतर प्रबंधन के कारण पिछले 3 वर्षों में उनके शेयर की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। उन्होंने पॉइंट्स में लिखा...

1. सभी 81 सूचीबद्ध पीएसयू (62 सीपीएसई, 12 पीएसबी, 3 सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां और आईडीबीआई बैंक) का कुल मार्केट कैप 225% बढ़ा है।

2. निफ्टी सीपीएसई के लगभग 78.8% के रिटर्न ने निफ्टी 500 (27.4%) और निफ्टी 50 (22.5%) को काफी पीछे छोड़ दिया है।

3. सार्वजनिक क्षेत्र के 12 सूचीबद्ध बैंकों का मार्केट कैप 5.45 लाख करोड़ रुपये (31.3.2021 तक) से 2.95 गुना (195%) बढ़ कर 16.12 लाख करोड़ रुपये (31.3.2024 तक) हो गया।

4. 15 सीपीएसई ने 76% से लेकर 100% तक की प्रभावशाली सीएजीआर का अनुभव किया है। इसके अलावा, 25 सीपीएसई ने 51% से 75% के बीच सीएजीआर के साथ मजबूत वृद्धि का प्रदर्शन किया है, जबकि 28 सीपीएसई ने 26% से 50% की सीमा के अंदर स्थिर विस्तार दर्शाया है।

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अटल सरकार में भी पीएसयू शेयरों का प्रदर्शन बेहतर

​वित्त मंत्री सीतारमण ने आगे कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तहत भी बेहतर प्रबंधन के कारण, पीएसयू के शेयरों ने यूपीए सरकार में प्रदर्शन की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया था। उन्होंने लिखा कि 1999-2004 में एनडीए सरकार के दौरान पीएसयू सूचकांक 300% से अधिक बढ़ गया, जो बीएसई सेंसेक्स की 70% बढ़त से कहीं अधिक था। वहीं 2004-09 में यूपीए के पहले कार्यकाल में पीएसयू सूचकांक 60% बढ़ा, जो सेंसेक्स की वृद्धि दर का केवल आधा था। 2009-14 में यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान पीएसयू सूचकांक में 6% की गिरावट आई, जबकि बेंचमार्क में 73% की वृद्धि हुई।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स पर ये दिया जवाब

वित्त मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) पर भी दुर्भावनापूर्ण हमला किया था। उनके दावों के विपरीत नरेंद्र मोदी सरकार में एचएएल का मार्केट कैप केवल 4 वर्षों में 1370% बढ़ गया है। यह 2020 में ₹17,398 करोड़ था और 7 मई, 2024 तक बढ़कर ₹2.5 लाख करोड़ हो गया है। एचएएल ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ₹29,810 करोड़ से अधिक के अपने अब तक के सबसे ज्यादा रेवेन्यू की घोषणा की और उसके पास ₹94,000 करोड़ से अधिक की मजबूत ऑर्डर बुक है।

सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस ने आयात पर निर्भरता को बढ़ावा दिया, जिससे भारत को कई वर्षों तक दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक के रूप में जाना जाता रहा। लेकिन मोदी सरकार के तहत हम एक महत्वपूर्ण बदलाव देख रहे हैं। भारत एक आयात-निर्भर देश से एक ऐसे देश में बदल रहा है, जो अब गर्व से हथियार निर्यातक की भूमिका में कदम रख रहा है। बढ़े हुए रक्षा खर्च और रक्षा में 'आत्मनिर्भरता' हासिल करने के लक्ष्य ने बीईएल, एचएएल, मझगांव डॉक आदि जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के विकास को बढ़ावा दिया है। अकेले वित्त वर्ष 2023-24 में, भारत ने 21,000 करोड़ रुपये के हथियार निर्यात की सूचना दी है। यह उपलब्धि हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों पर हमारी सरकार के मजबूत विश्वास को दर्शाती है।

डिसइनवेस्टमेंट के बाद नौकरियों पर भी विपक्ष के दावे झूठे

सीतारमण ने आगे लिखा कि विनिवेश के बाद लोगों के नौकरियां खोने के संबंध में भी झूठे दावे किए गए हैं। उदाहरण के लिए एयर इंडिया को लेते हैं। खरीदार के लिए सरकार की यह शर्त पहले से थी कि 1 वर्ष की अवधि तक कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा या छंटनी नहीं की जाएगी। इसके अलावा 1 वर्ष के बाद भी, अधिकतम लाभ के बराबर ही अनुकूल शर्तों पर छंटनी से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की पेशकश होगी। कानून के मुताबिक पीएफ और ग्रेच्युटी का लाभ भी दिया गया। पारदर्शी विनिवेश के बाद परिचालन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एयर इंडिया ने रोजगार के अवसरों में अच्छी वृद्धि देखी है। प्राइवेटाइजेशन के बाद से 7500 से अधिक नए कर्मचारी (फ्लाइंग और ग्राउंड स्टाफ दोनों) कंपनी में शामिल हुए हैं। इसलिए, नौकरियां खोने की बात तो दूर, हजारों लोग कंपनी में शामिल हो गए हैं।

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आगे कहा कि प्राइवेटाइजेशन के बाद NINL (नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड) में भी ऐसा ही बदलाव हुआ है। प्लांट के परिचालन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। अधिग्रहण के 3 महीने (अक्टूबर 2022) के अंदर प्लांट ने परिचालन शुरू कर दिया। परिचालन शुरू होने के 6 महीने के अंदर ब्लास्ट फर्नेस का उत्पादन 1.1 एमटीपीए की फुल कैपेसिटी तक बढ़ा दिया गया। कोक प्लांट की मरम्मत हो चुकी है और सितंबर 2023 में उत्पादन शुरू हो गया। 1 MTPA से 4.8 MTPA तक विस्तार की योजना पर काम किया जा रहा है। विनिवेश से न केवल परिचालन में सुधार हुआ है, बल्कि कर्मचारियों को भी फायदा हुआ है। विनिवेश से कर्मचारियों के बकाया 387.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

 

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