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आरबीआई के नए निर्देश का NBFC पर पड़ेगा असर, जानिए CEAT, MRF, Titan और ब्रिटानिया के शेयरों में क्या संकेत हैं

RBI ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लोन पर प्रोविजनिंग के नए निर्देश जारी किए हैं। इसका असर 6 मई को पीएफसी और आरईसी जैसी एनबीएफसी के स्टॉक्स पर दिखा। हालांकि, नए निर्देश का एनबीएफसी पर कितना असर पड़ेगा, इस बारे में अभी एनालिस्ट्स में एक राय नहीं है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 07, 2024 पर 9:59 AM
आरबीआई के नए निर्देश का NBFC पर पड़ेगा असर, जानिए CEAT, MRF, Titan और ब्रिटानिया के शेयरों में क्या संकेत हैं
एमआरएफ का स्टॉक कीमत के लिहाज से इंडिया का सबसे महंगा स्टॉक है। मार्च तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद MRF के स्टॉक्स में गिरावट आई।

एनालिस्ट्स में इस बारे में एक राय नहीं है कि इंफ्रास्ट्रक्टर प्रोजेक्ट्स को लोन पर आरबीआई के नए निर्देश का पीएफसी और आरईसी जैसी एनबीएफसी पर कितना असर पड़ेगा। इसका बैंकों खासकर पीएसयू बैंकों पर कितना असर पड़ेगा, यह स्पष्ट है। उन्हें अब ज्यादा प्रोविजनिंग करनी पड़ेगी, जो उनके लिए अच्छी खबर नहीं है। आईआईएफएल का मानना है कि आरबीआई के नए निर्देश का असर एनबीएफसी की टियर 1 कैपिटल रिक्वायरमेंट पर पड़ेगा। यह वैल्यूएशन मल्टीपल पर भी असर डालेगा। उधर, सीएलएसए का कहना है कि पीएफसी और आरईसी के पास पर्याप्त पूंजी है। इसलिए निवेशकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

पीएफसी (PFC) और आरईसी (REC) के स्टॉक्स 6 मई को शुरुआती गिरावट के बाद संभल गए। सवाल है कि क्या इन दोनों कंपनियों पर आरबीआई (RBI) के निर्देश का कोई असर नहीं पड़ेगा? दरअसल, जब कोई धारणा बहुत मजबूत हो जाती है तो अनिश्चितता के छोटे संकेत का भी उस पर बड़ा असर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि जो इनवेस्टर्स बड़े मुनाफे पर बैठे हैं, वे कुछ मुनाफा बुक करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इसका व्यापक असर नहीं पड़ेगा, लेकिन फिलहाल नई खरीदारी देखने को नहीं मिलेगी। इससे पिछले साल पीएफसी और आरईसी में देखी शानदार तेजी पर ब्रेक लग सकता है।

CEAT

सीएट ने चौथी तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है। साल दर साल आधार पर कंपनी की प्रॉफिट में गिरावट आई है। बेयर्स का मानना है कि रबर की कीमतें बढ़ रही हैं। कोटक इक्विटीज ने कहा है कि सीएट ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाई हैं। लेकिन, सबसे बड़ी टायर कंपनी एमआरएफ ने प्रोडक्ट्स की कीमतें नहीं बढ़ाई है। इस वजह से सीएट की बाजार हिस्सेदारी में कमी आ सकती है। उधर, बुल्स की दलील है कि ऑटो सेक्टर के लिए आउटलुक पॉजिटिव है। इसके अलावा CEAT पिछली पांच तिमाहियों से अपना मार्जिन एक दायरे में बनाए रखने में सफल रही है।

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