RBI FCNR B Deposit: आरबीआई रुपये में गिरावट रोकने के लिए बड़ा कदम उठा सकता है। इसका ऐलान केंद्रीय बैंक 8 अप्रैल को करेगा। सूत्रों का कहना है कि आरबीआई फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (एफसीएनआर (बी)) डिपॉजिट रूट शुरू करने का ऐलान कर सकता है। इससे फॉरेन डिपॉजिट अट्रैक्ट करने में मदद मिलेगी। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट थमेगी। केंद्रीय बैंक 8 अप्रैल को अपनी मौद्रिक पॉलिसी पेश करेगा। उसमें वह एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट शुरू करने का ऐलान कर सकता है।
एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में यूएई की 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी
भारतीय बैंकों में एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में यूएई की 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। इससे इस डिपॉजिट में एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट में गल्फ देशों की ज्यादा हिस्सेदारी का पता चलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई के इस कदम से एफसीएनआर-बी डिपॉजिट में आई गिरावट पर लगाम लगेगी। मैक्वायरी कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई का डेटा बताता है कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच एनआरआई डिपॉजिट करीब 26 फीसदी गिरकर 14.35 अरब डॉलर पर आ गया।
एफसीएनआर-बी फ्लो में पिछले वित्त वर्ष में बड़ी गिरावट
इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान एफसीएनआर-बी फ्लो गिरकर 0.94 अरब डॉलर रहा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 7.02 अरब डॉलर रहा। इससे पता चलता है कि इस डिपॉजिट में गिरावट को जल्द रोकना जरूरी है। खासकर ऐसे वक्त जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर काफी दबाव है। पिछले कुछ हफ्तों में डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट आई है।
आरबीआई के इस कदम से डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव घटेगा
ओसीबीसी बैंक में सीनियर इकोनॉमिस्ट लावण्या वेंकटेश्वरन ने कहा, "आरबीआई को रुपये पर दबाव को कम करने के लिए डॉलर इनफ्लो बढ़ाने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक के सामने बढ़ते इंपोर्ट बिल की भी चुनौती है।" इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 3 फीसदी गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2025-26 रुपये में रुपये में बीते एक दशक की सबसे बड़ी गिरावट आई है। यह FY26 में करीब 10 फीसदी गिरा है।
13 साल बाद एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट की वापसी होगी
केंद्रीय बैंक ने रुपये में गिरावट को रोकने के लिए पिछले हफ्ते कई कदम उठाए। उसने ऑफशोर फॉरवर्ड मार्केट में बहुत ज्यादा स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग पर लगाम लगाने की भी कोशिश की है। लेकिन, मार्केट पार्टिसिपेंट्स का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई को देखते हुए रुपये में गिरावट रोकने के लिए ये उपाय नाकाफी हैं। अगर आरबीआई एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट शुरू करने का ऐलान करता है तो करीब 13 साल बाद इस डिपॉजिट की वापसी होगी।
पहली बार केंद्रीय बैंक ने 2013 में एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट लॉन्च किया था
आरबीआई ने रुपये में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव रोकने के लिए 2013 में पहली बार एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट अट्रैक्ट करने के लिए स्पेशल स्वैप विंडो लॉन्च किया था। बैंकों को तीन साल या इससे ज्यादा मैच्योरिटी के अमेरिकी डॉलर डिपॉजिट को स्वैप करने की इजाजत दी गई थी। इसके लिए बैंकों के लिए 3.5 फीसदी की रियायती दर तय की गई थी। यह मार्केट रेट से कम था। इससे करीब 30 अरब डॉलर का इनफ्लो आया था। इससे रुपये में उतार-चढ़ाव में कमी आई थी।
क्या है एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट?
एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट एक तरह की डिपॉजिट स्कीम है। यह डिपॉजिट निश्चित अवधि के लिए होता है। इसमें नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI), पर्सन ऑफ इंडियन ऑरिजिन (PIO) या ओसीआई विदेशी करेंसी डिपॉजिट कर सकते है। इस जरिए विदेशी करेंसी की आवक बढ़ती है, जिससे रुपये पर दबाव घटता है।